छत्तीसगढ़

नशीली दवाई रखने की सजा: अदालत का फैसला

महासमुंद. बिना वैध अनुज्ञप्ति के बड़ी मात्रा में नशीली दवाई रखने के आरोप में दो व्यक्तियों को एनडीपीएस की विशेष न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी ने 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और 30-30 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की राशि नहीं पटाने पर 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा।

अभियोजन के अनुसार महासमुंद के सहायक उपनिरीक्षक को 25 फरवरी 24 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति रेलवे स्टेशन की तरफ से प्रतिबंधित नशीली दवाई बिक्री के लिए लेकर आ रहे है। सूचना पर घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ा गया, जिन्होंने अपना नाम प्रवीण साव उर्फ फोड़े तथा मनोज डांडेकर बताया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे में रखे 5,736 नग नशीली कैप्सूल को बरामद कर दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 21, 22 एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना उपरांत मामला कोर्ट को सौंपा था।

अभियोजन की ओर विशेष लोक अभियोजक एनडीपीएस जितेंद्र कुमार साहू ने पैरवी की। न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि समाज में युवा वर्ग का छोटे बालकों के मन:स्थिति नशे के गिरफ्त में लिया जा रहा है। जिसे यह भी ज्ञान नहीं है कि इसका उनके जीवन पर क्या प्रभाव होगा। ऐसे में नशे के इन कारोबारियों पर उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

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