राष्ट्रीयव्यापार

चांदी की कीमतों में उछाल, पहली बार ₹1.18 लाख प्रति किलो के पार पहुंची कीमतें

भारतीय बाजार में चांदी ने ऐतिहासिक कारनामा किया है। आज, बुधवार 23 जुलाई 2024 को सुबह खुलते ही इसकी कीमत पहली बार ₹1,18,000 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड शिखर पर पहुंच गई। यह आंकड़ा Goodreturns के आधार पर है और घरेलू बाजार में अब तक की सबसे ऊंची कीमत मानी जा रही है।

वैश्विक हवा और रुपये की कमजोरी का असर

सीएनबीसी-टीवी 18 की खबर के मुताबिक भारत में चांदी की कीमतों पर दुनिया भर में चांदी के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का बड़ा असर होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी (स्पॉट) की कीमत थोड़ी गिरकर 0.3% घटकर $39.15 प्रति औंस हो गई है, लेकिन फिर भी यह पिछले 14 सालों के उच्चस्तर के करीब बनी हुई है। इसका कारण है कि निवेशक तनावपूर्ण व्यापार नीतियों और अनिश्चितता के बीच सोने-चांदी जैसी ‘सुरक्षित पनाहगार’ संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं। साथ ही, रुपया कमजोर होने से आयातित चांदी महँगी हो जाती है, भले ही वैश्विक कीमतें स्थिर क्यों न हों।

विशेषज्ञों की राय: क्यों बढ़ रही है चमक?

मेहता इक्विटीज के राहुल कलंतरी (उपाध्यक्ष, कमोडिटीज) का कहना है कि चांदी में यह तेजी अमेरिका के व्यापार शुल्क की समय सीमा से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता के कारण आई है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक और ट्रेजरी यील्ड में कमजोरी के साथ-साथ रुपये में गिरावट ने भी घरेलू कीमतों को सहारा दिया है।

“गरीब का सोना” बन रहा है “स्मार्ट निवेश”?

पीएल कैपिटल – प्रभुदास लिल्लाधर के संदीप रायचुरा (सीईओ, रिटेल ब्रोकिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन एवं निदेशक) ने एक दिलचस्प बात कही। उनके अनुसार, चांदी अब ‘गरीब आदमी का सोना’ कहलाने के दिनों से आगे बढ़कर स्मार्ट निवेशकों के लिए एक रणनीतिक धातु बन रही है। उनका मानना है कि आपूर्ति में कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सोलर पैनलों और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग जैसे मजबूत कारणों से चांदी में बड़ी तेजी की संभावना है। सोने के मुकाबले चांदी का अनुपात (गोल्ड-टू-सिल्वर रेश्यो) अभी भी यह संकेत देता है कि चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं। रायचुरा ने अगले दो साल में चांदी के $48 से $58 प्रति औंस तक पहुँचने का अनुमान जताया है।

आगे क्या होगा? और बढ़ोतरी की संभावना

विश्लेषकों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी को $38.75–$38.55 प्रति औंस पर सहारा (सपोर्ट) और $39.45–$39.65 प्रति औंस पर रुकावट (रेजिस्टेंस) मिल सकती है। भारत में, सहारा ₹1,14,780–₹1,13,850 प्रति किलो और रुकावट ₹1,16,450–₹1,16,950 प्रति किलो के स्तर पर देखी जा रही है। हालांकि, कमजोर डॉलर, बनी रहने वाली मुद्रास्फीति और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में पैसे का लगातार आना निकट भविष्य में कीमतों को मजबूत बनाए रख सकता है। कई निवेशक अब चांदी को लॉन्ग टर्म ग्रोथ और अपनी दौलत को सुरक्षित रखने के लिए एक विश्वसनीय विकल्प मानने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी में अभी और ऊपर जाने की गुंजाइश बाकी है।

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