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कानपुर के अस्पतालों में चूल्हे बुझने की नौबत, उर्सला में आज भर की गैस, हैलट में पांच दिन का ही स्टॉक

कानपुर। रसोई गैस की किल्लत अब घरों और बाजार से निकलकर अस्पताल तक पहुंच गई। प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों की मेस और कैंटीन भी इस संकट की चपेट में आ गई। कानपुर के उर्सला, हैलट और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में संचालित मेस संचालकों के सामने गैस सिलेंडर की कमी बड़ी चिंता बनती जा रही है।

कई कैंटीन संचालकों के पास कमर्शियल सिलेंडरों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। किसी के पास महज एक दिन की गैस बची है तो कुछ संचालकों के पास चार से पांच दिन तक का ही इंतजाम है। इसके बाद भोजन व्यवस्था कैसे चलेगी, इसे लेकर संचालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रोजाना हजारों मरीज, तीमारदार और मेडिकल छात्र भोजन के लिए कैंटीन और मेस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में गैस खत्म होने की स्थिति सीधे तौर पर उनकी दैनिक जरूरतों को प्रभावित कर सकती है।

उर्सला में आज शाम तक की गैस बची

उर्सला की मेस में एक समय में 600 मरीज, तीमारदार का खाना बनाया जाता है। दिन भर में तीन बार में 1800 का खाना तैयार होता है। मेस संचालक ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट कह दिया है कि सिर्फ शुक्रवार शाम तक की गैस उसके पास उपलब्ध है। इसको लेकर कार्यवाहक निदेशक बालेंद्र पाल काफी परेशान हैं। कहते हैं कि मेस संचालक ने सुविधा बाधित न होने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद मरीज-तीमारदारों की भोजन व्यवस्था को लेकर चिंता है। संचालक ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कराए हैं, उसका दावा है कि अस्पतालों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति होगी।

हैलट में भी संकट, पांच दिन का इंतजाम

हैलट में भी गैस किल्लत से गंभीर स्थिति बन रही है। यहां मेस में एक समय में 450 मरीज-तीमारदार का खाना तैयार किया जाता है। नोडल अफसर डॉ विनय कटियार कहते हैं कि मेंस संचालक के पास अभी पांच दिन की गैस व्यवस्था है। इसके बाद उसने आश्वासन दिया है कि डीजल भट्टी के जरिए खाना तैयार किया जाएगा। वहीं रोटी के लिए पहले से ही बिजली से चलने मशीन लगी है। डॉ कटियार कहते हैं कि संचालक ने सुविधा बरकरार रखने की बात कही है। फिर भी हमें मौजूदा स्थिति को देखते हुए मरीजों की चिंता है।

मेडिकल कॉलेज की मेस में दो दिन की गैस

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में चलने वाली मेस भी गैस संकट की चपेट में आने वाली हैं। यहां 1200 छात्र-छात्राओं के भोजन को लेकर प्रबंधन भी परेशान है। कैंपस प्रभारी डॉ संतोष बर्मन कहते हैं कि मेस संचालकों के पास महज दो दिन की गैस है। वहीं, गैस सिलेंडर न होने से व्यवस्था बरकरार रखने के लिए डीजल भट्टी या कोयला-लकड़ी से खाना तैयार करने का दावा संचालकों ने किया है।

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