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शादी के कार्ड में चीनी की जगह अब सिलेंडर की मांग, अधिकारियों को मिले 180 कार्ड

साहब, बेटी की बारात 20 अप्रैल को आनी है। 400 लोगों का भोजन तैयार होना है। मेहमान 15 से जुट जाएंगे। 15 सिलेंडर की जरूरत है। इसका प्रबंध करवा दीजिए। जिला आपूर्ति कार्यालय में शादी के कार्ड के साथ कुछ ऐसे ही आवेदनों की भरमार पड़ी है। अब तक 180 कार्ड वहां पर आ चुके हैं।

प्रयागराज, साहब, बेटी की बारात 20 अप्रैल को आनी है। 400 लोगों का भोजन तैयार होना है। मेहमान 15 से जुट जाएंगे। 15 सिलेंडर की जरूरत है। इसका प्रबंध करवा दीजिए। जिला आपूर्ति कार्यालय में शादी के कार्ड के साथ कुछ ऐसे ही आवेदनों की भरमार पड़ी है। जब से शादी के कार्ड का नियम आया है, जिन घरों में विवाह है, वहां से कार्ड और प्रार्थना पत्र जिला आपूर्ति कार्यालय में पहुंच रहे हैं। अब तक 180 कार्ड वहां पर आ चुके हैं, जिसमें से 50 की डिमांड कंपनियों को भेजी भी जा चुकी है।

झूंसी निवासी विनोद पांडेय के घर में 20 अप्रैल को शादी है। बिटिया के ब्याह के लिए तैयारी तो बहुत पहले कर ली थी। हलवाई ने 12 सिलेंडर की मांग कर ली है, जबकि तीन से चार सिलेंडर घर में लगने की उम्मीद है। अब संकट के दौर में सिलेंडर कहां से लाएं, इस पर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने प्रार्थना पत्र डीएसओ कार्यालय में दे दिया है। विनोद पांडेय ने बताया कि बहुत तलाश करने पर रिश्तेदारों से तीन सिलेंडर मिल सका था। अब बाकी का इंतजाम कहां से हो पाए।

मम्फोर्डगंज के जितेंद्र कुमार की बिटिया का ब्याह 28 अप्रैल को है। उन्हें हलवाई के लिए सात सिलेंडर की जरूरत है जो शादी के दिन इस्तेमाल होगा। वहीं हल्दी, महिला संगीत आदि कार्यक्रमों के लिए तीन सिलेंडर की जरूरत है। इसके लिए आवेदन कर रहे हैं। डीएसओ सुनील कुमार ने बताया कि लगातार शादी के कार्ड आ रहे हैं, इसमें से 50 कार्ड की डिमांड भेज चुके हैं। शेष पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि शादी के लिए सभी को सिलेंडर दिलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कि आज से चार दशक पहले जब चीनी कंट्रोल से मिलती थी तो लोग शादी के कार्ड लगाकर अधिक चीनी लिया करते थे। अब समय बदल गया तो सिलेंडर लिया जा रहा है।

आंख-अंगूठे ने दिया धोखा, लगा रहे दौड़

रसोई गैस की किल्लत के बीच केवाईसी कराने में भी बुजुर्ग उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। तमाम ऐसे लोग हैं जिनके अंगूठे और उंगलियों के निशान समय के साथ बायोमीट्रिक मशीन पर अपडेट नहीं हो रहे हैं और मोतियाबिंद के ऑपरेशन के कारण आईरिस मशीन पर भी काम नहीं हो रहा है। जिले की सभी 144 एजेंसियों पर रोजाना चार से छह ऐसे उपभोक्ता पहुंच रहे हैं।

त्रिवेणी गैस एजेंसी के संचालक मोहित मिश्र ने बताया कि जिन लोगों ने लंबे समय से बुकिंग नहीं कराई है, उनके लिए केवाईसी अनिवार्य है। अगर सभी ओर से परेशानी हो रही तो एक ही विकल्प है कि इन लोगों को आधार केंद्र जाकर अपना आधार कार्ड अपडेट कराना होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी उंगली का बायोमीट्रिक मशीन पर निशान न आए, ऐसे मामले बहुत कम हैं।

डीएसी है, फिर भी नहीं मिल रहा सिलेंडर

सिलेंडर की किल्लत के बीच एजेंसियां भी लोगों को परेशान कर रही हैं। मंगलवार के एडीएम नागरिक आपूर्ति विजय शर्मा के पास दर्जनों अधिवक्ता पहुंचे और अपनी समस्या बताई। सभी के कनेक्शन अलग-अलग एजेंसी के थे। उन लोगों ने मोबाइल पर आए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) को दिखाया और बताया कि सिलेंडर नहीं मिल रहा है। अधिवक्ताओं ने बताया कि उनकी बुकिंग को काफी समय बीत चुका है। इसके बाद भी अब तक घर सिलेंडर नहीं आया।

किसी का डीएसी 28 मार्च का आया था तो किसी का एक और दो अप्रैल को आया था। अधिवक्ताओं की सूचना पर अधिकारी ने एक-एक कर एजेंसी संचालकों को फोन कर इसका कारण पूछा तो एजेंसी संचालक कुछ बोल नहीं सके। एडीएम ने बताया कि वैसे तो स्थिति सामान्य है, लेकिन कुछ एजेंसियों की शिकायत आ रही है। जिसके बाद डीएसओ को बोला गया है कि सभी एजेंसियों का बैकलॉग एक बार फिर चेक करें। जिससे आम नागरिकों को समस्या न है।

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