पीएम मोदी 28 को वाराणसी में महिलाओं की सभा को करेंगे संबोधित

लखनऊ, संसद में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भाजपा अब इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की दिशा में और भी आगे बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी में महिलाओं की सभा संबोधित करेंगे। इसकी पूरी कमान महिलाओं के हाथों में होगी। प्रदेश भाजपा कार्यालय पर रविवार को प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने तैयारियों के संबंध में बैठक की।
वाराणसी महानगर व जिला इकाई के साथ हुई बैठक में महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, भाजपा महानगर अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि व वरिष्ठ कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, व्यापक जनसंपर्क अभियान, बूथ स्तर तक की जिम्मेदारियों व व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। महिला मोर्चा की पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ करने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम महिला सशक्तीकरण को समर्पित होगा। महिला सहभागिता को ही कार्यक्रम के केंद्र में रखा गया है।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का प्रत्येक कार्यक्रम राष्ट्र के लिए प्रेरक होता है। मातृशक्ति संगठनात्मक शक्ति और परिश्रम के साथ तैयारियों में जुटें, ताकि यह कार्यक्रम नारी सामर्थ्य का उदाहरण बन सके। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं और नीतियों को महिलाओं की आर्थिक समृद्धि व सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित किया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने का संकल्प भी संसद में प्रस्तुत किया। जिस संकल्प को सपा और कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों दलों ने अपने महिला विरोधी एजेंडे के कारण साकार नहीं होने दिया।
21 को बड़े मार्च की तैयारी
आरक्षण बिल गिरने के विरोध में भाजपा 21 अप्रैल को बड़ा मार्च निकालने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इसमें मुख्यमंत्री के अलावा दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन के अन्य पदाधिकारी शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक मार्च मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर विधानसभा तक होगा।
संसद से नहीं पास हो पाया था विधेयक
आपको बता दें कि बीते दिन लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान (131 वां) संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में गिर गया। मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। विपक्ष ने इसका विरोध किया, जिससे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई का आंकड़ा हासिल नहीं हो सका।




