
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां जमीन के बंटवारे को लेकर हुए विवाद ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया। उरगा थाना क्षेत्र के चीतापाली गांव में एक दिव्यांग बेटे ने अपनी ही मां की लाठी से पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि पिता पर भी जानलेवा हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।
यह घटना न केवल गांव को हिला देने वाली है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों के टूटने और गुस्से के खतरनाक परिणामों की भी भयावह तस्वीर पेश करती है।
जमीन विवाद बना खूनी संघर्ष की वजह
पुलिस के अनुसार, ग्राम चीतापाली निवासी रामकुमार यादव लंबे समय से परिवार की जमीन के बंटवारे की मांग कर रहा था। परिवार द्वारा बंटवारे से इनकार करने पर आरोपी मानसिक रूप से आक्रोशित हो गया।
विवाद बढ़ने के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसने गुस्से में आकर अपनी मां पर हमला कर दिया।
मां की दर्दनाक मौत, पिता गंभीर रूप से घायल
वारदात के दौरान आरोपी ने अपनी मां जानकुंवर यादव पर लाठी से कई बार हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने अपने पिता श्याम लाल यादव को भी नहीं छोड़ा और उन पर भी हमला कर दिया।
घटना में पिता को गंभीर चोटें आईं—
- पैर फ्रैक्चर हो गया
- शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें
- अस्पताल में इलाज जारी
दिव्यांग बेटे ने दिया वारदात को अंजाम
जानकारी के अनुसार आरोपी रामकुमार यादव दिव्यांग है और लाठी के सहारे चलता है। बावजूद इसके उसने इस भयावह घटना को अंजाम दिया। वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया था, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
पुलिस ने कुछ घंटों में किया गिरफ्तार
उरगा थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी की तलाश शुरू की और कुछ ही घंटों में उसे ग्राम अंजोरीपाली से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।
हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है—
- हत्या का मामला दर्ज
- हत्या के प्रयास का मामला दर्ज
- आरोपी को न्यायालय में पेश करने की तैयारी
मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
गांव में मातम और दहशत का माहौल
इस दर्दनाक घटना के बाद चीतापाली गांव में मातम और दहशत का माहौल है। ग्रामीण इस बात से स्तब्ध हैं कि जमीन के छोटे से विवाद ने एक पूरे परिवार को बिखेर दिया।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आपसी संवाद और समझ की कमी किस तरह रिश्तों को हिंसा में बदल सकती है।




