
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। मामले में 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में जैविक माता-पिता, तस्कर, बिचौलिये, खरीदार और एक अस्पताल संचालक शामिल हैं। पुलिस अब तक कुल 9 बच्चों को सुरक्षित बचा चुकी है, जबकि सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, 5 जून को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एंटी नार्कोटिक्स सेल ने पहाड़गंज स्थित आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास कार्रवाई करते हुए ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को एक नवजात शिशु की सौदेबाजी करते हुए गिरफ्तार किया था। मौके से 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद हुई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी प्रशांत चौधरी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। पूछताछ, तकनीकी निगरानी और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से नवजात बच्चों को खरीदकर उन्हें संतानहीन दंपतियों या बेटे की चाह रखने वाले लोगों को लाखों रुपये में बेचता था।
जांच में गुरुग्राम की आशा कार्यकर्ता ज्योति उर्फ कमलेश को मुख्य बिचौलिया पाया गया। गुजरात के साबरकांठा निवासी शंकर शिशुओं की सप्लाई करता था, जबकि सुगनाबेन और कांतिभाई गमार ने अपना बच्चा गिरोह को बेचा था। दिल्ली के रोहिणी निवासी गरिमा जैन और सतीश जैन ने 8 लाख रुपये में नवजात खरीदा। ऋषिकेश की केतकी गुप्ता ने करीब 4 लाख, हरिद्वार के आभा सिंह और अमित प्रताप सिंह ने लगभग 5 लाख रुपये में बच्चा खरीदा। रिटायर्ड शिक्षक राम प्रकाश निषाद पर वर्ष 2025 में एक बच्चा खरीदने का आरोप है।
पुलिस ने रोहिणी, ऋषिकेश, मथुरा और हरिद्वार से चार अन्य बच्चों को भी सुरक्षित बरामद किया। इनमें 16 दिन से लेकर 1 वर्ष 1 महीने तक की आयु के बच्चे शामिल हैं। सभी 9 बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश कर संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच में अब तक आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़ा कोई एंगल सामने नहीं आया है। पुलिस कई लाख रुपये के अवैध लेन-देन की जांच कर रही है। बैंक खातों की मनी ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गुजरात और दिल्ली के जैविक माता-पिता की पहचान की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।




