
पुरी/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दीघा में भगवान जगन्नाथ मंदिर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जगन्नाथ रथ यात्रा के बीच पुरी मंदिर से जुड़े दैतापति ने दीघा मंदिर में ‘धाम’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
पुरी जगन्नाथ मंदिर के दैतापति पाणिग्रही ने एक बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने पहले भी इस विषय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी सलाह को नजरअंदाज किया गया।
हालांकि, उनके बयान में राजनीतिक टिप्पणी भी शामिल रही, जिसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
‘धाम’ शब्द के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
दैतापति पाणिग्रही ने कहा कि मंदिर कहीं भी बनाया जा सकता है, लेकिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार हर मंदिर को ‘धाम’ नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि—
- जगन्नाथ धाम की धार्मिक मान्यता पुरी से जुड़ी है।
- देशभर में भगवान जगन्नाथ के कई मंदिर हैं।
- लेकिन सभी स्थानों को धाम की संज्ञा नहीं दी जा सकती।
उन्होंने दावा किया कि दीघा मंदिर के साथ ‘धाम’ शब्द जोड़ने को लेकर उन्होंने पहले ही अपनी आपत्ति जताई थी।
ममता सरकार पर लगाया आरोप
दैतापति ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी धार्मिक सलाह को स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों और परंपराओं के आधार पर उन्होंने अपनी बात रखी थी, लेकिन उसे नहीं माना गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान किसी के अहंकार को स्वीकार नहीं करते। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
शुभेंदु अधिकारी की तारीफ
दैतापति ने पश्चिम बंगाल सरकार के मौजूदा नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद दीघा से ‘धाम’ शब्द हटाने का फैसला लिया गया।
उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप कदम उठाया।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
पुरी के अन्य पुजारियों ने भी उठाए थे सवाल
इससे पहले पुरी मंदिर से जुड़े कई पुजारियों ने दीघा मंदिर को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर की थीं।
उनका कहना था कि—
- भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक मूर्ति लकड़ी की होती है।
- धार्मिक परंपराओं का पालन आवश्यक है।
- मंदिर निर्माण का स्वागत है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में बदलाव नहीं होना चाहिए।
पुरी के दैतापति भवानी दास ने भी कहा था कि कोई भी व्यक्ति मंदिर बना सकता है, लेकिन धार्मिक रूप से मान्यता प्राप्त धामों की अपनी अलग परंपरा होती है।
मई 2025 में हुई थी दीघा मंदिर की स्थापना
दीघा में भगवान जगन्नाथ मंदिर की स्थापना मई 2025 में हुई थी। इसे पुरी मंदिर की तर्ज पर विकसित किया गया था।
मंदिर निर्माण के बाद से ही इसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई थी। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जोड़ा, जबकि कुछ विरोधियों ने इसे राजनीतिक कदम बताया।
धार्मिक परंपरा और राजनीति के बीच विवाद
जगन्नाथ धाम विवाद अब केवल धार्मिक विषय तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव भी दिखाई दे रहे हैं।
जहां एक पक्ष इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा का मुद्दा बता रहा है, वहीं दूसरे पक्ष इसे राजनीति से जोड़कर देख रहा है।
मुख्य बातें एक नजर में
- दीघा जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद फिर चर्चा में।
- पुरी दैतापति ने ‘धाम’ शब्द के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति।
- ममता सरकार पर सलाह नहीं मानने का लगाया आरोप।
- शुभेंदु अधिकारी के फैसले की तारीफ की।
- पुरी मंदिर की परंपराओं का हवाला दिया गया।



