


दौसा। राजस्थान में Rajasthan Nikay Chunav 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के आखिरी दिन भारतीय जनता पार्टी ने दौसा जिले में अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। लंबे मंथन और बैठक के बाद बीजेपी ने दौसा नगर परिषद, बांदीकुई नगर पालिका और बेसवा नगर पालिका के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं।
दौसा नगर परिषद में कुल 55 वार्ड हैं। बीजेपी ने इनमें से 52 वार्डों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। हालांकि तीन वार्डों को फिलहाल पार्टी ने होल्ड पर रखा है। इनमें वार्ड नंबर 11 और 13 एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं, जबकि वार्ड नंबर 20 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है।
नामांकन की अंतिम तारीख होने के कारण पार्टी द्वारा सूची जारी किए जाने के बाद प्रत्याशियों के सामने अब नामांकन प्रक्रिया समय पर पूरी करने की चुनौती है।
दौसा नगर परिषद में 3 वार्डों पर अभी फैसला बाकी
बीजेपी ने 55 में से 52 वार्डों में उम्मीदवार उतार दिए हैं। पार्टी ने तीन वार्डों के लिए अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।
फिलहाल जिन वार्डों पर नजर है:
- वार्ड नंबर 11 — एसटी आरक्षित
- वार्ड नंबर 13 — एसटी आरक्षित
- वार्ड नंबर 20 — ओबीसी आरक्षित
इन सीटों पर पार्टी की ओर से अंतिम निर्णय का इंतजार है। इन वार्डों में टिकट को लेकर स्थानीय स्तर पर दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ी हुई है।
बांदीकुई में 40 में से 38 वार्डों पर उम्मीदवार
दौसा जिले की बांदीकुई नगर पालिका में भी बीजेपी ने ज्यादातर वार्डों में अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। यहां कुल 40 वार्डों में चुनाव होना है, जिनमें से पार्टी ने 38 वार्डों पर उम्मीदवारों के नाम जारी किए हैं।
दो वार्डों में अभी उम्मीदवारों के नाम सामने नहीं आए हैं।
- वार्ड नंबर 27 — सामान्य महिला के लिए आरक्षित
- वार्ड नंबर 31 — सामान्य श्रेणी
इन दोनों वार्डों को लेकर पार्टी के अंतिम फैसले का इंतजार है।
बेसवा नगर पालिका में भी प्रत्याशियों की घोषणा
बीजेपी ने दौसा जिले की बेसवा नगर पालिका के लिए भी प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। यहां कुल 25 वार्ड हैं और पार्टी ने इन वार्डों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं।
बेसवा की सूची जारी होने के साथ ही जिले के तीन प्रमुख नगर निकायों में बीजेपी की चुनावी तैयारी को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।
आखिरी समय तक टिकट रोकने की रणनीति
राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों ने कई जगहों पर उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची अंतिम समय तक रोककर रखी। राजनीतिक हलकों में इसे संभावित बगावत और टिकट कटने से नाराज दावेदारों को संभालने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कई स्थानों पर पार्टी ने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने के बजाय सीधे चुनावी सिंबल उपलब्ध कराया। इसके बाद प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नामांकन केंद्र पहुंचकर पर्चा दाखिल कर रहे हैं।
आखिर क्यों अपनाई गई अंतिम समय की रणनीति?
इस रणनीति के पीछे कई राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं—
- टिकट की घोषणा के बाद संभावित बगावत को रोकना।
- नाराज दावेदारों को निर्दलीय चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश।
- पार्टी के भीतर टिकट को लेकर विवाद कम करना।
- अंतिम समय तक स्थानीय समीकरणों का आकलन करना।
- मजबूत उम्मीदवार को चुनावी सिंबल देकर सीधे मैदान में उतारना।
नामांकन के आखिरी दिन बढ़ी चुनावी हलचल
नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन राजस्थान के अलग-अलग नगर निकाय क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं।
दौसा में बीजेपी की सूची सामने आने के बाद अब कई वार्डों में चुनावी मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट हो गई है। वहीं जिन सीटों पर अभी प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं हुए हैं, वहां दावेदारों की नजर पार्टी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी। इसके साथ ही चुनाव प्रचार, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल दौसा जिले में बीजेपी के 52 वार्डों में प्रत्याशी घोषित करने के बाद चुनावी माहौल गरमा गया है। अब सबसे ज्यादा नजर उन सीटों पर है, जहां पार्टी ने आखिरी समय तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।




