

नई दिल्ली। NHAI Toll Plaza Fraud मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है। टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े, अवैध टोल कलेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में ईडी ने 7 राज्यों में एक साथ 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में की जा रही है।
ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने बुधवार तड़के धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दौरान अधिकारियों की नजर कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क पर है, जिसमें NHAI के टोल प्लाजा पर कलेक्शन प्रक्रिया में अनियमितता किए जाने का आरोप है।
फर्जी सॉफ्टवेयर से बनाई जा रही थीं टोल रसीदें?
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से फर्जी टोल रसीदें तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल कुछ ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को कथित तौर पर फर्जी FASTag के जरिए टोल से निकालने में किया जा रहा था।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि टोल से मिलने वाली रकम को कथित तौर पर NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया जा रहा था। अगर जांच में ये आरोप साबित होते हैं तो इससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान पहुंचने की आशंका है।
फॉरेंसिक जांच में सॉफ्टवेयर इस्तेमाल के संकेत
जांच के दौरान फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड से ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिलने की बात सामने आई है। अब ईडी की टीमें इस पूरे नेटवर्क से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटा रही हैं।
तलाशी के दौरान कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्ड, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े से हासिल रकम कहां गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
टोल संचालकों और IT कर्मचारियों की भूमिका की जांच
ED की जांच में टोल प्लाजा संचालकों, IT कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कथित तौर पर टोल कलेक्शन से जुड़ी रकम को अलग-अलग स्तरों पर बांटा जाता था।
एजेंसी अब मनी ट्रेल खंगालने में जुटी है। बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच के जरिए कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह गिरफ्तार
इस मामले में वाराणसी से आलोक सिंह की गिरफ्तारी का भी जिक्र सामने आया है। उसे कथित तौर पर इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि वाराणसी के हरहुआ इलाके से वह अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
इसके अलावा वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब ₹62.87 करोड़ के कथित स्टांप शुल्क घोटाले की जांच भी जारी बताई गई है। जांच एजेंसियों की नजर देशभर के 200 से ज्यादा टोल प्लाजा पर है, जिनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश में बताए जा रहे हैं।
पहले भी हुई थी 14 ठिकानों पर छापेमारी
टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जी टोल कलेक्शन मामले में पिछले महीने भी ईडी ने कई स्थानों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान भी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और कोलकाता में स्थित परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया था।
अब एक बार फिर 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी से इस मामले की जांच और तेज हो गई है। ईडी की मौजूदा कार्रवाई में डिजिटल सबूत, वित्तीय लेन-देन और कथित मनी ट्रेल पर खास फोकस है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कार्रवाई होती है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
एक नजर में पूरी कार्रवाई
- जांच एजेंसी: प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- कानून: PMLA, 2002
- कुल ठिकाने: 14
- राज्य/क्षेत्र: 7
- जांच का मुद्दा: कथित टोल प्लाजा फर्जीवाड़ा
- आरोप: फर्जी टोल रसीद, अनधिकृत सॉफ्टवेयर और फर्जी FASTag का इस्तेमाल
- जांच: डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खाते, दस्तावेज और मनी ट्रेल
- मुख्य फोकस: NHAI टोल कलेक्शन में कथित वित्तीय अनियमितता




