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68 लाख की सड़क सालभर में हुई जर्जर! गड्ढों में धान-बेशरम रोपकर ग्रामीणों ने किया अनोखा प्रदर्शन, बोले- अब चक्का जाम करेंगे

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर इलाके में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया।

ग्राम गौरघाट, देहारगुड़ा, गिरहोला, आमागुड़ा, सिंहार और रामपारा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हुए। पहले उन्होंने रैली निकाली और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद जर्जर सड़क के गड्ढों में धान के साथ बेशरम के पौधे रोपकर अपना विरोध जताया।

ग्रामीणों के इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।

तीन साल में बनी सड़क, एक साल में ही उखड़ने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस सड़क का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। करीब तीन साल बाद सड़क बनकर तैयार हुई। लेकिन निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे।

ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क के कई हिस्सों में पहले ही साल बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। जगह-जगह सड़क उखड़ने लगी थी। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से भी की और सड़क की मरम्मत कराने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि उस समय उन्हें मरम्मत का आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

गड्ढों में धान रोपकर जताया विरोध

शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे ग्रामीणों ने जर्जर सड़क के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में धान के पौधों के साथ बेशरम के पौधे रोप दिए। ग्रामीणों ने इस प्रदर्शन के जरिए सड़क की बदहाली और जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।

ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क पर गड्ढे इतने बड़े हो गए हैं कि उनमें पौधे लगाए जा सकते हैं, तो विभाग को सड़क की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए।

हजारों लोगों की आवाजाही, स्कूली बच्चों को भी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ती है। गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा सहित कई गांवों के लोग रोजाना इसी मार्ग से आवागमन करते हैं।

इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल भी बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे इस सड़क से होकर स्कूल पहुंचते हैं।

सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ स्कूली बच्चों के लिए भी परेशानी बनी हुई है। ग्रामीणों ने दुर्घटना की आशंका जताते हुए जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।

गारंटी खत्म होने की बात पर ग्रामीण नाराज

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने सड़क की खराब हालत को लेकर अधिकारियों से शिकायत की तो पहले उन्हें मरम्मत का भरोसा दिया गया। बाद में कथित तौर पर यह कहा गया कि सड़क निर्माण की गारंटी पांच वर्ष की होती है और अब गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है।

इस जवाब से ग्रामीणों में और नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण के कुछ समय बाद ही वह खराब हो गई थी, तो उस समय शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

ग्रामीण सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की जांच की भी मांग कर रहे हैं।

विकास के दावों पर उठे सवाल

एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और दूसरी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की बात करती है। वहीं मैनपुर क्षेत्र में सड़क की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अच्छी सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही, किसानों के परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी बेहद जरूरी है।

उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ा।

मांग पूरी नहीं हुई तो चक्का जाम की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जर्जर सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

ग्रामीणों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर चक्का जाम भी किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखें और जल्द से जल्द समाधान की दिशा में कार्रवाई करें।

फिलहाल ग्रामीणों के इस अनोखे प्रदर्शन ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांग पर विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

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