उत्तर प्रदेश में ब्लड बैंकों पर बड़ी कार्रवाई, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर सहित कई जिलों के ब्लड सेंटर बंद”

उत्तर प्रदेश में ब्लड बैंकों पर एफएसडीए की सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर कई जिलों के ब्लड बैंकों पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग की अंतर-जनपदीय टीमों ने 17 जिलों में कुल 54 ब्लड बैंकों की जांच की, जिसमें कई गड़बड़ियों और मानकों की अनदेखी मिलने पर 10 ब्लड बैंकों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। इस कार्रवाई में प्रमुख रूप से आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली और अन्य जिले शामिल हैं।
कठोर जांच और मानक उल्लंघन
एफएसडीए की जांच टीमों ने इन ब्लड बैंकों में रक्त और उसके घटकों के सुरक्षित तापमान पर भंडारण, मानक के अनुरूप जांच प्रक्रिया, तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता और अभिलेखों का सत्यापन किया। जांच के दौरान पाया गया कि कई केंद्रों पर मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद इन बैंकों के संचालन पर रोक लगा दी गई।
ब्लड बैंकों पर कार्रवाई के परिणाम
जांच में अनियमितताएं मिलने पर एफएसडीए ने आगरा के पांच, गोरखपुर के एक, प्रयागराज के दो, हाथरस और जालौन के एक-एक ब्लड बैंक को बंद कर दिया। इनमें प्रमुख नाम आगरा के आगरा चेरिटेबल ब्लड सेंटर, जय हिंद चेरिटेबल ब्लड सेंटर, लाइफ लाइन चेरिटेबल ब्लड सेंटर, श्री बालाजी चेरिटेबल ब्लड सेंटर, और श्री जगदंबा चेरिटेबल ब्लड सेंटर हैं। इसके अलावा गोरखपुर के मानया चेरिटेबल ब्लड सेंटर, प्रयागराज के हरदेव तिवारी चेरिटेबल ब्लड सेंटर और एसजीएस चेरिटेबल ब्लड सेंटर, हाथरस के मां केला देवी चेरिटेबल ब्लड सेंटर और जालौन का दारशी चेरिटेबल ब्लड सेंटर भी बंद कर दिए गए हैं।
एफएसडीए की कड़ी चेतावनी
एफएसडीए की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया कि मानकों का उल्लंघन करने वाले ब्लड बैंकों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य में रक्तदाता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भविष्य में जारी रहेगी निगरानी
एफएसडीए ने यह भी कहा है कि इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और प्रदेश के सभी ब्लड बैंकों की नियमित निगरानी की जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि रक्तदान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो, और मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्ध कराया जा सके।




