

मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर बढ़ाई आमदनी, दो तालाबों में कर रहे मछली पालन
जशपुर। खेती को अगर नई सोच और बेहतर योजना के साथ किया जाए, तो खेत केवल फसल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि सालभर कमाई का केंद्र बन सकता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा निवासी युवा किसान अंकित लकड़ा ने अपने खेत में ऐसा ही एकीकृत कृषि मॉडल तैयार किया है। कभी बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित अब मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती के जरिए आय के कई स्रोत विकसित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ अंकित लकड़ा को भी मिला है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता मिली, जिससे उन्होंने अपने कृषि कार्य को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
धान की खेती से शुरू हुआ सफर
अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय सीमित थी। आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। विभागीय मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।
तालाब बनने के बाद उनके खेत की उपयोगिता बढ़ गई। अब तालाब के पानी का इस्तेमाल गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए भी किया जा रहा है। इससे अंकित वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी अलग-अलग फसलों की खेती कर पा रहे हैं।
उन्होंने खेत में आम, लीची और अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। आने वाले समय में इन पौधों से उन्हें बागवानी के रूप में अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।
मछली और मुर्गी पालन को जोड़ा
अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। इस शेड में एक समय में करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों का पालन किया जा सकता है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का तरीका अपनाया है।
मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह मुर्गी पालन और मछली पालन एक-दूसरे को सहारा देते हैं।
इस एकीकृत व्यवस्था से किसान को एक ही स्थान पर अलग-अलग गतिविधियों से आय प्राप्त करने का अवसर मिलता है। साथ ही खेत, तालाब और पशु आधारित संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होता है।
तालाब की मेड़ पर लगाए फलदार पौधे
अंकित ने तालाबों की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे लगाए हैं। इन पौधों की सिंचाई तालाब के पानी से की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और कटाव रोकने में भी सहायता मिलती है।
फलदार पौधों से भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का रास्ता तैयार होगा। इस तरह तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं है, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी कई गतिविधियों का आधार बन गया है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 8 लाख की सहायता
अंकित लकड़ा को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए करीब 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई। इसके साथ उन्हें पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।
सरकारी सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से अंकित के लिए मछली पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हुआ। उनका कहना है कि अधिकारियों से मिली जानकारी ने उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद की।
बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर
अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता से उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर मिल रहा है।
इस बहुआयामी मॉडल के कारण उन्हें सालभर उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने में मदद मिल रही है। कृषि, बागवानी, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन का यह समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है।
युवाओं के लिए खेती बनी प्रेरणा
अंकित लकड़ा की कहानी उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो खेती को पारंपरिक काम के बजाय आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध जमीन, पानी और संसाधनों का सही नियोजन करके खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
अंकित का खेत अब केवल फसल उत्पादन की जगह नहीं रहा। यह ग्रामीण उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। उनकी पहल से यह संदेश मिलता है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी, मेहनत और नई सोच के साथ किसान अपनी आय के कई रास्ते तैयार कर सकते हैं।
