


नारायणपुर। अबूझमाड़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं। सरकार और प्रशासन उन इलाकों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां कभी पहुंचना भी बड़ी चुनौती माना जाता था। हालांकि, जमीनी हकीकत बताती है कि अबूझमाड़ की विकास यात्रा अभी लंबी और कठिन है।
आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां ग्रामीणों को दैनिक जरूरत की सामग्री खरीदने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। राशन, नमक, तेल और अन्य जरूरी सामान के लिए उन्हें साप्ताहिक बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी अब भी ग्रामीण जीवन की बड़ी समस्या बनी हुई है।
कुतुल का साप्ताहिक बाजार बना जीवनरेखा
अबूझमाड़ के कुतुल में लगने वाला साप्ताहिक बाजार आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा की तरह है। इस बाजार में ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के साथ ही अपनी उपज और अन्य सामग्री बेचने भी पहुंचते हैं।
कुतुल बाजार में अबूझमाड़ की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं। एक ओर ऐसे ग्रामीण हैं, जो आज भी 15 से 30 किलोमीटर और कई मामलों में करीब 40 किलोमीटर तक पैदल चलकर बाजार पहुंचते हैं। दूसरी ओर क्षेत्र में बदलते माहौल और बढ़ती सुरक्षा के बीच युवतियां अब पहले की तुलना में बिना भय के बाहर निकलती दिखाई देती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों तक अब भी पक्की सड़क नहीं पहुंची है। बारिश के मौसम में रास्ते और भी कठिन हो जाते हैं। ऐसे में बाजार तक पहुंचना समय और मेहनत दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
स्कूल भवन है, लेकिन शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर सवाल
अबूझमाड़ के कई गांवों में स्कूल भवन तो मौजूद हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की नियमित उपस्थिति अब भी एक बड़ी समस्या है। शिक्षा व्यवस्था की यह स्थिति बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल तक पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई का नियमित संचालन सुनिश्चित करना जरूरी है। केवल भवन बना देने से शिक्षा की सुविधा पूरी नहीं होती। इसके लिए शिक्षक, आवश्यक संसाधन और लगातार निगरानी भी जरूरी है।
इसी तरह स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में लंबी दूरी तय करना उनके लिए परेशानी बढ़ा देता है।
बारिश से पहले उपलब्ध कराया जाता है राशन
दैनिक जरूरत के सामान की कमी को लेकर नारायणपुर के खाद्य अधिकारी अलाउद्दीन खान ने बताया कि बारिश से पहले ही ग्रामीणों को तीन से चार महीने का राशन उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान ग्रामीणों को खाद्यान्न के लिए परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना है।
प्रशासन की ओर से राशन की अग्रिम व्यवस्था की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की जरूरत केवल खाद्यान्न तक सीमित नहीं है। उन्हें नमक, तेल, दवाइयों, कपड़ों और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए भी बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बाजार और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
विकास के साथ भरोसा कायम करना भी जरूरी
नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकल रहे अबूझमाड़ में विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यहां ग्रामीणों का भरोसा जीतना, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को नियमित बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कुतुल बाजार में युवतियों का बिना भय के आना-जाना बदलाव का सकारात्मक संकेत है। यह बताता है कि सुरक्षा और विश्वास का माहौल धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। लेकिन दूसरी ओर लंबी दूरी तय कर बाजार पहुंचते ग्रामीण, खराब रास्ते और सुविधाओं की कमी यह भी याद दिलाते हैं कि विकास की असली चुनौती अभी बाकी है।
अबूझमाड़ के लिए लंबी योजना की जरूरत
अबूझमाड़ में स्थायी विकास के लिए सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, राशन दुकानों और स्थानीय बाजारों का विस्तार जरूरी है। साथ ही ग्रामीणों को रोजगार, कृषि, वनोपज और स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत करना भी आवश्यक है।
अबूझमाड़ की विकास यात्रा में सरकार और प्रशासन के प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन प्रयासों का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब दूरस्थ गांवों तक सुविधाएं नियमित रूप से पहुंचेंगी। कुतुल का साप्ताहिक बाजार इस क्षेत्र की जरूरतों और बदलाव दोनों का प्रतीक है। यहां दिखाई देने वाली तस्वीर बताती है कि नक्सलवाद के बाद शांति की राह खुली है, लेकिन विकास की मंजिल तक पहुंचने के लिए अभी लगातार प्रयास करने होंगे।




