रायपुर

जिनवाणी का श्रवण ही मोक्षमार्ग की सच्ची यात्रा – चातुर्मास का त्याग जीवन को बनाता है और अधिक सुरक्षित व संयमित: साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी

(उमा वाणी)न्यूज रायपुर

आत्मोत्थान चातुर्मास 2025

जिनवाणी का श्रवण ही मोक्षमार्ग की सच्ची यात्रा – चातुर्मास का त्याग जीवन को बनाता है और अधिक सुरक्षित व संयमित: साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी

रायपुर। श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी में आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत आयोजित प्रवचनमाला में सोमवार को परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने धर्मरत्न प्रकरण ग्रंथ का वाचन करते हुए जिनवाणी का श्रवण करना बहुत ही दुर्लभ है। आपको मानव जीवन एक बार फिर मिल जाएगा लेकिन जिनवाणी का श्रवण करने का मौका आपको बार-बार नहीं मिलेगा। आज शासन और संसार को नहीं जिसने नहीं समझा वह मोक्ष मार्ग तक कभी नहीं पहुंच पाएगा, जिस दिन शासन और संसार को समझ जाएंगे उसे दिन आप अपने आप को मोक्ष मार्ग के करीब पाएंगे। जबकि आज तो धर्म 90 प्रतिशत लोगों को दुख की तरह लगता है, एक कष्ट लगता है।

अब 4 महीने का चातुर्मास लोगों को बंधन की तरह लग रहा है लेकिन उन्हें नहीं पता कि यह बंधन नहीं, यह एक सिक्योरिटी है। जैसे आप आतंकवादियों के इलाके में जाते हैं तो आपको बुलेट प्रूफ जैकेट दी जाती है। इलाका अगर और भी खतरनाक है तो आपको दो बुलेट प्रूफ जैकेट दे दी जाएगी वैसे ही आपको इस चातुर्मास में चार बुलेट प्रूफ जैकेट मिल रहा है तो आप किस चुनेंगे। जाहिर सी बात है कि आप चार बुलेट प्रूफ जैकेट को चुनेंगे ताकि आपकी सुरक्षा का दायरा और बढ़ जाए। ऐसे ही आपको चातुर्मास के इन चार महीनों में होटल का खाना, मूवी हॉल जाना, रात्रि भोजन करना और जमीकंद का त्याग करना है। आपको निश्चय कषाय के अंगारों से बचाना है तो यह प्रण आपको लेने होंगे।

*श्री गिरनार तप पारणा उत्सव में तपस्वियों का हुआ भव्य अभिनंदन*

रायपुर स्थित श्री जिनकुशलसूरी दादाबाड़ी धाम में श्री गिरनार तप पारणा उत्सव का मुख्य आयोजन अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। साध्वी श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में आयोजित इस पावन अवसर पर वातावरण धर्म, भक्ति और संयम की अनूठी छटा से आलोकित रहा।

सुबह 9 बजे : तपस्वियों का भव्य अभिनंदन

सुबह 9:00 बजे से तपस्वियों का भव्य अभिनंदन समारोह आरंभ हुआ। श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच तप की विजय का यह क्षण अत्यंत प्रेरणादायक रहा। सभी ने तपस्वियों का जयगान करते हुए उन्हें सम्मानित किया। यह समारोह आत्मशुद्धि, संयम और धर्म की महत्ता का अनुपम प्रतीक बना।

दोपहर 11:45 बजे : साधर्मिक वात्सल्य

अभिनंदन समारोह के पश्चात दोपहर 11:45 बजे साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से धर्म संवर्धन का लाभ उठाया और स्नेहपूर्ण वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

विशेष आकर्षण

भक्ति रस से ओतप्रोत वातावरण तब और प्रगाढ़ हो गया जब मुंबई के सुप्रसिद्ध संगीतकारों ने गिरनारजी और नाकोड़ा जी के भक्ति भजनों की संगीतमय प्रस्तुति दी। भजनों की ध्वनि से पूरा धाम भक्ति की लहरों में डूब गया।

आयोजन के सूत्रधार व लाभार्थी

तप अभिनंदन उत्सव के मुख्य सूत्रधार डॉ. विपिन बागरेचा, नागदा (मप्र) रहे। यह आयोजन नीमाला (माया) धर्मपत्नी मितल झाबक के मानसक्षेत्र तप की पूर्णाहुति तथा स्व. श्रीमती तेजुबाई सोनारराज जी की स्मृति में संपन्न हुआ।

साथ ही झाबक परिवार (भाटागांव रायपुर) एवं मितल-पीयूषजी कोचर परिवार के विशेष सहयोग से यह आयोजन दिव्य और अविस्मरणीय बन गया।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने बताया कि दादाबाड़ी में सुबह 8.45 से 9.45 बजे साध्वीजी का प्रवचन होगा। आप सभी से निवेदन है कि जिनवाणी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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