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बिना सर्जरी के शिशु के दिल का छेद बंद, बीएचयू में मिली बड़ी सफलता

वाराणसी: आईएमएस बीएचयू के कॉर्डियोलॉजी विभाग में एक अत्यधिक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया से प्रदेश में एक बड़ी सफलता हासिल की गई है। यहां 1.2 किलो के एक शिशु का दिल का छेद बिना सर्जरी के पिकोलो डिवाइज क्लोजर तकनीक के माध्यम से बंद किया गया। यह प्रक्रिया प्रदेश में पहली बार की गई, जिसमें पांच विभागों के डॉक्टरों का सहयोग मिला।

शिशु की स्थिति और इलाज

दस दिन पहले, 25 दिन का बच्चा एक निजी अस्पताल से बीएचयू रेफर होकर आया था। जन्म के बाद से ही उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था क्योंकि उसका वजन बहुत कम था। पीडियाट्रिक विभाग की न्यूनेटोलॉजिस्ट डॉ. अनु शर्मा ने जांच के बाद पाया कि बच्चा पीडीए (पेटेंट डक्टस आर्टिरियोसिस) से पीड़ित है, यानी उसके दिल में छेद था।

इसके बाद, बच्चें को पीडियाट्रिक कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिभा राय के पास रेफर किया गया। डॉ. प्रतिभा राय ने इस छोटे से शिशु का इलाज करने का जोखिम लिया और पिकोलो डिवाइज क्लोजर तकनीक से उसके दिल के छेद को बंद करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में बच्चे का वजन कम होने के बावजूद, डॉक्टरों ने अत्यधिक सावधानी बरती और सफलतापूर्वक इलाज किया।

सफलता के पीछे पांच विभागों का सहयोग

इस जटिल प्रक्रिया में कॉर्डियोथोरेसिक, न्यूनेटोलॉजिकल, रेडियोलॉजी और एनेसिथिसियोलॉजी विभागों के डॉक्टरों का सहयोग भी महत्वपूर्ण था। इन सभी विशेषज्ञों के साथ मिलकर शिशु के दिल का छेद बंद किया गया, जिससे बच्चे की जिंदगी को खतरे से बचाया गया।

डॉक्टरों और अधिकारियों की बधाई

आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने इस सफल उपचार के लिए डॉ. प्रतिभा राय, डॉ. अनु शर्मा, डॉ. संजीव, और डॉ. प्रतिमा को बधाई दी। इसके अलावा, विभागाध्यक्ष प्रो. विकास अग्रवाल, प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया, और प्रो. एपी सिंह का भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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