धीरेंद्र शास्त्री का नारा: अयोध्या वाले हनुमानजी खड़े, प्रयागराज वाले पड़े, हमारे वाले सनातन विरोधियों के सामने अड़े

बाबा बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तीन दिवसीय हनुमंत कथा के दूसरे दिन बुधवार को अरैल घाट पर स्थित कथास्थल पर शाम पांच बजे पहुंचे। कथा के शीर्षक ‘सुंदरकांड’ के अंतर्गत उन्होंने बुधवार को ‘व्यर्थ’ शब्द के सामाजिक, राजनीतिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में विस्तार से बखान किया।
बाबा बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तीन दिवसीय हनुमंत कथा के दूसरे दिन बुधवार को अरैल घाट पर स्थित कथास्थल पर शाम पांच बजे पहुंचे। कथा के शीर्षक ‘सुंदरकांड’ के अंतर्गत उन्होंने बुधवार को ‘व्यर्थ’ शब्द के सामाजिक, राजनीतिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में विस्तार से बखान किया। धीरेंद्र शास्त्री ने शुरुआत हनुमानाष्टक की संगीतमयी प्रस्तुति से की, फिर अगले पल जय-जय राधा रमण हरी बोल, जय-जय राधा रमण हरी बोल से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया तो परिसर भक्ति से सराबोर हो चला।
इस बीच धीरेंद्र शास्त्री बोले, कल दिव्य दरबार लगना है, आप लोग नारियल लेकर अइयो। फिर बंधवा स्थित बड़े हनुमानजी मंदिर में हनुमानजी के दिव्य दर्शन की अनुभूति पर कह पड़े, क्या आनंद आया हनुमानजी का दर्शन करके। अयोध्या वाले हनुमानजी खड़े हैं, प्रयागराज वाले पड़े हैं। हमारे वाले सनातन विरोधियों के सामने अड़े हैं। इस पर श्रद्धालुओं के और 74 कदम चुगलखोर से दूर रहना। इनके करीब भी गए तो तुम्हरा सब कुछ व्यर्थ हो जाएगा।
नींद, पराई नारी और निंदा से बचकर चलते रहोगे तो अपने लक्ष्य को हासिल कर लोगो। हाथ उठाओ, ये सब करोगे ना ठठरी। फिर संगीतमयी प्रस्तुति से उन्होंने भजन ‘जीवन मौत का खेल है पगले क्या रोना क्या धोना, जितनी राम ने भर दी चाभी उतना चले खिलौना’। इस पर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। परिसर जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम, अक्षयवट की जय हो, मनकामेश्वर की जय हो, परमार्थ निकेतन की जय हो की जयकारा होने लगी।
सरस्वती लुप्त नहीं, प्रयागराज में लिप्त हैं
हनुमंत कथा से पहले पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बुधवार को प्रयागराज के धार्मिक व पौराणिक महत्व के प्राचीन स्थलों का भ्रमण किया। वे सबसे पहले त्रिवेणी संगम पहुंचे और पुण्य की डुबकी लगाई। जय त्रिवेणी जय प्रयाग आरती समिति के अध्यक्ष प्रदीप पांडेय के आचार्यत्व में उन्होंने गंगा पूजन किया। पूजन में प्रयाग उत्थान समिति के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह भी साथ रहे। पूजन के बाद वे बंधवा स्थित बड़े हनुमानजी मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने विधिविधान से हनुमानजी का अभिषेक किया और उनकी आरती उतारी।
मंदिर में पूजन-अर्चन के दौरान उन्होंने देश व समाज के कल्याण की कामना की। उसके बाद धीरेंद्र शास्त्री अकबर के किले में स्थित अक्षयवट व सरस्वती कूप का दर्शन-पूजन किया। यहां पर करीब आधे घंटे बैठे। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि तीर्थराज प्रयाग में आज मुझे दिव्य अनुभूति हो रही है। कूप को देखकर ऐसा लग रहा है कि सरस्वती लुप्त नहीं है बल्कि पूरे प्रयागराज में लिप्त है। यह यहां के निवासियों का सौभाग्य है कि वे अद्भुत शहर में रह रहे हैं।
युधिष्ठिर-दुर्योधन और निरहुआ भी पहुंचे
धारावाहिक ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने मंच पर पहुंचते ही पूछा कि महाभारत किस-किस ने देखा है, श्रद्धालुओं ने दोनों हाथ उठाकर हां बोला। फिर उन्होंने सवाल किया कि किस-किस के घर में महाभारत होता है, इस पर किसी ने हाथ नहीं उठाया। तब गजेंद्र चौहान ने महाभारत के एक संवाद के जरिए श्रद्धालुओं को हिंदू राष्ट्र बनाने की शपथ दिलाई। दुर्योधन की भूमिका निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि ऐसा समागम देखकर लगा कि हिन्दू जाग्रत है और भारत हिन्दू राष्ट्र बनकर रहेगा। धर्मांतरण के खिलाफ बहन-बेटियों को जागरूक करिए। पूर्व सांसद व भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ और भाजपा सांसद मनोज तिवाी भी आशीष लेने पहुंचे।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लिया आशीर्वाद
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य धीरेंद्र शास्त्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उन्होंने करीब आधा घंटे तक बैठकर हनुमंत कथा सुनी। आशीर्वाद लेने वालों में पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया, हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, सांसद मनोज तिवारी, मेयर गणेश केसरवानी प्रमुख रहे। डॉ. उदय प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
संगम के तट पर एक नए संगम का दर्शन : चिदानंद
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज मैं संगम के तट पर एक नए संगम का दर्शन कर रहा हूं। आज ही केदारनाथ बाबा का कपाट खुला है लेकिन 15 अप्रैल को ही दर्शन करने के लिए तीन महीने की ऑनलाइन बुकिंग हो चुकी है। ऐसा मोदी व योगी के नेतृत्व की वजह से संभव हो सका है।




