अफ्रीकी देश सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच एक भारतीय कंपनी और उसके CEO का नाम सामने आया है। अमेरिका ने शुक्रवार को एक भारतीय नागरिक और उसकी कंपनी समेत आठ व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का आरोप है कि इन लोगों और कंपनियों ने सूडान में चल रहे संघर्ष के दौरान ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बनकर काम किया, जिसने युद्ध को लंबा खींचने में मदद की।
अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के अनुसार, रायपुर के आलोक चौधरी और उनकी कंपनी एसबीएल एनर्जी लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि कंपनी ने सूडान की एक फर्म को विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की आपूर्ति की थी। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस सामग्री का इस्तेमाल बाद में सूडानी सेना के सैन्य ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में हुआ।
अमेरिका ने भारतीय कंपनी पर क्या आरोप लगाए हैं?
अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, एसबीएल एनर्जी लिमिटेड, जिसे एमिन एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है, ने सूडान की टारगेट मल्टीएक्टिविटीज कंपनी (TMAC) को 200 से अधिक खेपों में विस्फोटक और संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई। अमेरिका का कहना है कि यह कंपनी सूडानी सेना के हथियार भंडार को बनाए रखने से जुड़ी थी। इसी मामले में टीएमएसी और उसके महाप्रबंधक तारिक हुसैन मोहम्मद मदानी को भी प्रतिबंधित किया गया है।
सूडान में क्यों जारी है संघर्ष?
सूडान में अप्रैल 2023 से सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच संघर्ष जारी है। इस लड़ाई ने देश में गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि कुछ कंपनियां और नेटवर्क दोनों पक्षों को हथियार, विस्फोटक और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहे थे, जिससे संघर्ष और लंबा खिंचा।
और किन संस्थाओं पर हुई कार्रवाई?
अमेरिका ने सूडान और मिस्र की कुछ अन्य कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें पोर्ट्स इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस कंपनी ने संघर्ष शुरू होने के बाद सैन्य वर्दी, जूते और हथियारों से जुड़े उपकरणों के आयात में भूमिका निभाई। इसके अलावा पनामा की टैलेंट ब्रिज एसए से जुड़े तीन अधिकारियों को भी प्रतिबंधित किया गया है।
अमेरिका ने प्रतिबंधों को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि जिन नेटवर्क पर कार्रवाई की गई है, वे सूडान के संघर्ष में शामिल पक्षों को हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाके उपलब्ध कराने से जुड़े थे। उनके अनुसार, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क पर दबाव बनाना है, जो सूडान में जारी संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं।




