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फर्जी विरासत बनाकर संपत्ति हड़पने का खेल! 39 साल से भारत में रह रहा था आरोपी, पुलिस जांच में बांग्लादेशी नागरिक होने का दावा

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मेजा क्षेत्र में संपत्ति हड़पने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जांच में आरोपी की पहचान कमलेश कुमार विश्वास के रूप में हुई है और उसके बांग्लादेशी नागरिक होने तथा करीब 39 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रहने की जानकारी सामने आई है।

मामला एक बुजुर्ग महिला की संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि महिला के मृत पति के नाम से फर्जी विरासत तैयार कर संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, संपत्ति के रिकॉर्ड और आरोपी की भारत में रहने की स्थिति की भी जांच कर रही है।

मृत पति की फर्जी विरासत तैयार करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, मेजा क्षेत्र की रहने वाली बुजुर्ग महिला गीता विश्वास ने शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप है कि कमलेश कुमार विश्वास ने उनके मृत पति अमन कुमार विश्वास की कथित तौर पर फर्जी विरासत तैयार की।

शिकायत में कहा गया कि इसी कथित कूटरचित विरासत और अन्य दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति को अपने नाम कराने का प्रयास किया गया और संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की।

जांच में सामने आईं अहम बातें

पुलिस जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आने की बात कही गई है—

  • आरोपी का नाम कमलेश कुमार विश्वास बताया गया है।
  • उस पर फर्जी विरासत तैयार करने का आरोप है।
  • शिकायतकर्ता ने संपत्ति पर कब्जा करने की शिकायत की थी।
  • कथित कूटरचित दस्तावेजों के जरिए संपत्ति अपने नाम कराने का मामला सामने आया।
  • पुलिस के मुताबिक, जांच में आरोपी के बांग्लादेशी नागरिक होने की जानकारी मिली।
  • पुलिस का दावा है कि वह करीब 39 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहा था।

एसीपी मेजा को सौंपी गई थी जांच

मामला केवल पारिवारिक या संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं माना गया। शिकायत में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनके आधार पर संपत्ति अपने नाम कराने के आरोप लगाए गए थे।

इसी वजह से मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त मेजा को सौंपी गई। जांच टीम ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ दस्तावेजों और आरोपी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपी की नागरिकता और भारत में उसके लंबे समय से रहने को लेकर भी जानकारी मिलने की बात कही गई है।

39 साल से भारत में रहने का दावा

पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक है और करीब 39 वर्षों से भारत में रह रहा था।

यदि जांच में सामने आए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य इन दावों की पुष्टि करते हैं, तो मामला संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी के साथ-साथ अवैध रूप से भारत में रहने के पहलू से भी जुड़ सकता है।

हालांकि, नागरिकता और भारत में रहने की अवधि से जुड़े दावों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मानी जाएगी।

संपत्ति विवाद से शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत बुजुर्ग महिला की शिकायत से हुई। महिला ने आरोप लगाया कि उनके पति की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे दावा किया गया।

ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, विरासत संबंधी दस्तावेज, पहचान पत्र और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बनते हैं। पुलिस इन्हीं दस्तावेजों की पड़ताल के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जीवाड़ा कैसे किया गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

आगे की जांच में खुल सकते हैं और राज

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। कथित फर्जी विरासत किस तरह तैयार हुई, दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया और संपत्ति को अपने नाम कराने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे, इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस की आगे की कार्रवाई दस्तावेजी साक्ष्यों और पूछताछ से सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कथित संपत्ति धोखाधड़ी के साथ फर्जी दस्तावेज और आरोपी की कथित नागरिकता से जुड़ा गंभीर पहलू भी सामने आया है।

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