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दिल्ली में टोल टैक्स पर बड़ा बदलाव: कमर्शियल वाहनों पर हर साल 5% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें नई दरें

 

दिल्ली में टोल टैक्स सिस्टम बदलने की तैयारी, कमर्शियल वाहनों पर बढ़ेगा बोझ

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के लिए टोल टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। दिल्ली नगर निगम (MCD) एक नई योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत राजधानी में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर हर साल 5 प्रतिशत की स्वचालित बढ़ोतरी लागू की जा सकती है।

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य नगर निगम की राजस्व आय को बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।


क्या है नया प्रस्ताव?

प्रस्तावित बदलाव के अनुसार:

  • कमर्शियल वाहनों पर टोल टैक्स हर साल 5% बढ़ेगा
  • हर वाहन श्रेणी के लिए नई दरें लागू होंगी
  • 7-एक्सल और उससे बड़े ट्रकों के लिए अलग श्रेणी बनाई जाएगी

प्रस्तावित टोल दरें (प्रति एंट्री)

नई व्यवस्था में टोल टैक्स इस प्रकार हो सकता है:

  • टैक्सी और टेम्पो: ₹100
  • बस और कैंटर: ₹200
  • 2-एक्सल (6-पहिया ट्रक): ₹400
  • 3-एक्सल (10-पहिया ट्रक): ₹800
  • 4 से 6-एक्सल ट्रक: ₹2,000
  • 7-एक्सल और भारी ट्रक: ₹2,000 प्रति एंट्री या ₹60,000 मासिक पास विकल्प

कैसे लागू होगा नया सिस्टम?

MCD का यह प्रस्ताव केवल दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी टोल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम है।

मुख्य बदलाव:

  • बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री-फ्लो सिस्टम
  • स्वचालित टोल कलेक्शन तकनीक
  • टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म
  • डिजिटल भुगतान और ट्रैकिंग सिस्टम

प्रशासनिक प्रक्रिया क्या है?

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टोल टैक्स में बदलाव के लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • पहले प्रस्ताव तैयार किया जाता है
  • संबंधित समितियों में चर्चा होती है
  • MCD सदन और सरकार से मंजूरी ली जाती है
  • इसके बाद नियम लागू किए जाते हैं

क्यों किया जा रहा है बदलाव?

MCD का मानना है कि इस कदम से:

  • राजस्व में वृद्धि होगी
  • ट्रैफिक जाम में कमी आएगी
  • टोल कलेक्शन अधिक पारदर्शी बनेगा
  • प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी

ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर

इस प्रस्ताव से लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर पड़ सकता है:

  • माल ढुलाई लागत बढ़ सकती है
  • किराए में वृद्धि की संभावना
  • छोटे ट्रांसपोर्टरों पर दबाव बढ़ेगा

आगे क्या?

फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और अंतिम मंजूरी के बाद ही लागू होगा। साथ ही, दिसंबर 2026 तक दिल्ली के सभी प्रमुख बॉर्डर टोल पॉइंट्स को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की योजना भी है।

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