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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका! तत्काल जमानत से इनकार, 2013 दुष्कर्म केस में बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे स्वयंभू बाबा आसाराम को मंगलवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसे तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया है। साथ ही कहा है कि बेल की जरूरत को लेकर अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जाएगा। खास बात है कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट की तरफ से जारी आदेश को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी थी।

2013 का मामला

उच्चतम न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के 2013 के एक मामले में स्वयंभू बाबा आसाराम द्वारा दायर उस याचिका पर राजस्थान सरकार से मंगलवार को जवाब मांगा, जिसमें उसने अपनी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखने वाले राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

क्या वजह बताई

पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘हम अभी जमानत नहीं दे रहे हैं। राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद ही इस बात पर विचार करेंगे कि क्या जमानत देने की कोई गंभीर आवश्यकता है, जैसे कि ऐसी स्थिति जिसमें उसके जीवन को खतरा हो।’

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 27 मई को इस मामले में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन उसे भारतीय दंड संहिता और बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत बच्चे के सामूहिक दुष्कर्म और ‘पेनिट्रेटिव’ यौन शोषण के आरोपों से बरी कर दिया था।

आसाराम को 25 अप्रैल, 2018 को अपने आश्रम में एक नाबालिग शिष्या के यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उसे भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

क्या था 2013 का मामला

आसाराम को साल 2013 में गिरफ्तार किया गया था। तब 2 अनुयायियों ने आरोप लगाए थे कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ है। ट्रायल कोर्ट की तरफ से आसाराम और दो सह आरोपियों शिल्पी और शरतचंद को दोषी पाया गया था, जिसके बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था।

बाद में सह आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। मई में ही उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इसके बाद आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया था।

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