
दुर्ग जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 45 लाख रुपये मूल्य की जब्त अवैध शराब का विधिवत नष्टीकरण किया। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित की गई शराब को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत 4 अगस्त 2026 को थाना जामुल परिसर में वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया।
यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों, कलेक्टर द्वारा गठित नष्टीकरण समिति की निगरानी और संबंधित विभागों की मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। इसका उद्देश्य जब्त शराब के दोबारा अवैध उपयोग या दुरुपयोग की किसी भी संभावना को पूरी तरह समाप्त करना था।
112 मामलों की जब्त शराब का हुआ निस्तारण
दुर्ग जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में जब्त की गई शराब का रिकॉर्ड परीक्षण किया गया। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने और शराब को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाए जाने के बाद उसके नष्टीकरण की अनुमति दी गई।
इस अभियान के दौरान कुल 112 प्रकरणों में जब्त 5480.082 बल्क लीटर (B.L.) शराब को नष्ट किया गया। इसका वर्तमान अनुमानित बाजार मूल्य करीब 45 लाख रुपये बताया गया है।
प्रमुख आंकड़े
- कुल प्रकरण: 112
- कुल जब्त शराब: 5480.082 बल्क लीटर
- अनुमानित बाजार मूल्य: लगभग ₹45 लाख
- कार्रवाई की तिथि: 4 अगस्त 2026
- स्थान: थाना जामुल, दुर्ग
- कार्रवाई का आधार: न्यायालयीन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद वैधानिक प्रावधानों के अनुसार नष्टीकरण
समिति की निगरानी में हुई पूरी प्रक्रिया
जप्त शराब को कलेक्टर द्वारा गठित नष्टीकरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा परीक्षण और अनुमोदन के बाद निर्धारित नियमों का पालन करते हुए शराब का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से निस्तारण कराया गया।
पूरी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता, सुरक्षा और न्यायालयीन निर्देशों का विशेष रूप से पालन किया गया, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
नष्टीकरण कार्रवाई के दौरान कई विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- नगर पुलिस अधीक्षक (छावनी)
- थाना प्रभारी जामुल
- नायब तहसीलदार
- आबकारी उपनिरीक्षक
- पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी
- आबकारी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी
सभी अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न कराई गई।
क्यों जरूरी था शराब का नष्टीकरण?
जब्त की गई शराब न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित हो चुकी थी। ऐसे में उसका सुरक्षित निस्तारण आवश्यक था, ताकि—
- अवैध शराब दोबारा बाजार में न पहुंच सके।
- किसी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना समाप्त हो।
- न्यायालयीन आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।
- कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा मजबूत बनी रहे।
पुलिस ने नागरिकों से की अहम अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, संग्रहण या बिक्री की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल लोगों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। समाज को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने में आम नागरिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दुर्ग पुलिस और आबकारी विभाग की यह संयुक्त कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि जिले में अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।


