महाराष्ट्र FDA पर हाई कोर्ट सख्त: ‘पहले गोली चलाना, फिर सवाल पूछना’ नहीं चलेगा; कैडिला को मिली बड़ी राहत


मुंबई। दवा कंपनी कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने नियामक एजेंसी की कार्रवाई में जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले कार्रवाई करना और बाद में सवाल पूछना कानून के मुताबिक सही प्रक्रिया नहीं है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाद की पीठ कैडिला फार्मास्युटिकल्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने FDA के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके तहत उसकी कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ स्टॉक जब्त करने की कार्रवाई की गई थी।
‘वाइल्ड वेस्ट’ वाला नियम कानून में नहीं चलेगा
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने FDA की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि “पहले गोली चलाना और बाद में सवाल पूछना” भले ही वाइल्ड वेस्ट का नियम हो, लेकिन कानून के शासन में ऐसी प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जा सकती।
पीठ ने नियामक की शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि FDA के पास कार्रवाई करने की शक्ति जरूर है, लेकिन उसका इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर FDA की ओर से इसी तरह कठोर और जल्दबाजी वाली कार्रवाई के मामले सामने आते रहे तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
₹2.45 करोड़ का स्टॉक किया गया था जब्त
मामला कैडिला की कुछ दवाओं की ब्रांडिंग में कथित समानता से जुड़ा है। FDA ने राज्यभर में कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण रोकने के साथ करीब ₹2.45 करोड़ का स्टॉक जब्त करने का आदेश दिया था।
जिन दवाओं का उल्लेख मामले में हुआ, उनमें शामिल हैं:
- Aceloc 150
- Aceloc 150 Plus
- Aceloc 300
- Aceloc 300 Plus
कंपनी की ओर से अदालत में दावा किया गया कि बिक्री रोकने और अन्य कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
FDA ने बताया एहतियाती कदम
सरकारी वकील नेहा भिडे ने अदालत को बताया कि संबंधित दवाओं के नाम और ब्रांडिंग में समानता के कारण भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। इसी वजह से FDA ने कार्रवाई को एहतियाती कदम के रूप में उठाया।
हालांकि, अदालत ने इस दलील के बावजूद प्रक्रिया का पालन किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
पीठ ने कहा कि किसी कंपनी के खिलाफ कड़ा कदम उठाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए। यानी नियामक कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय और उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
‘मच्छर मारने के लिए तलवार’ वाली टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने FDA की कार्रवाई के तरीके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी के पास तलवार चलाने की ताकत है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब उसका इस्तेमाल मच्छर मारने के लिए किया जाए।
अदालत का संकेत था कि नियामक के पास व्यापक कानूनी शक्तियां हैं, लेकिन हर मामले में उनका इस्तेमाल जरूरत और परिस्थितियों के अनुपात में होना चाहिए।
पीठ ने कहा कि इन शक्तियों का इस्तेमाल समझदारी और उचित तरीके से किया जाना चाहिए।
दवाइयां नहीं मिलने वाले मरीजों की भी चिंता
अदालत ने इस मामले में केवल कंपनी को हुए आर्थिक नुकसान पर ध्यान केंद्रित नहीं किया। पीठ ने कहा कि उसे इस बात की भी चिंता है कि बिक्री रोकने के आदेश के कारण पिछले दो सप्ताह में जिन मरीजों को संबंधित दवाएं नहीं मिल पाईं, उन्हें परेशानी हुई होगी।
इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने नियामक कार्रवाई के व्यापक प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया।
FDA ने आदेश वापस लेने पर जताई सहमति
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद महाराष्ट्र FDA ने कैडिला के खिलाफ मौजूदा बिक्री रोकने के आदेश वापस लेने पर सहमति जताई। एजेंसी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में कंपनी के खिलाफ कोई नई कार्रवाई करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
इससे फिलहाल कैडिला फार्मास्युटिकल्स को बड़ी राहत मिली है।
कोर्ट के निर्देश का सार
- कंपनी के खिलाफ कार्रवाई में उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी।
- कड़े कदम से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
- नियामक शक्तियों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से हो।
- जल्दबाजी में की गई कठोर कार्रवाई पर अदालत जुर्माना लगा सकती है।
- मौजूदा बिक्री रोकने के आदेश वापस लेने पर FDA सहमत हुआ।
क्यों अहम है हाई कोर्ट की टिप्पणी?
यह मामला सिर्फ कैडिला फार्मास्युटिकल्स और महाराष्ट्र FDA तक सीमित नहीं है। अदालत की टिप्पणियां नियामक एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। किसी कंपनी या कारोबारी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई करते समय सार्वजनिक हित के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय का पालन करना भी जरूरी है।
हाई कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि नियामक के पास कार्रवाई की शक्ति होना और उस शक्ति का उचित तरीके से इस्तेमाल करना दो अलग बातें हैं। कार्रवाई जरूरी होने पर भी संबंधित पक्ष को सुनने और प्रक्रिया का पालन करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
फिलहाल FDA द्वारा बिक्री रोकने के आदेश वापस लेने की सहमति के बाद कैडिला को राहत मिली है, जबकि अदालत की सख्त टिप्पणियों ने नियामक कार्रवाई के तरीके पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है।




