‘लुटेरी दुल्हन’ का खतरनाक खेल: पहले प्यार, फिर अश्लील वीडियो और ₹5 लाख की ब्लैकमेलिंग



संभल। शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह की महिला सदस्य पहले लोगों से मोबाइल पर बातचीत कर विश्वास जीतती थी, फिर उन्हें मिलने के लिए किराये के कमरे में बुलाया जाता था। पुलिस के मुताबिक कमरे में हिडन कैमरा लगा होता था और बाद में वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर पैसों की मांग की जाती थी।
रजपुरा थाना पुलिस ने मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
पहले मीठी बातें, फिर ब्लैकमेलिंग का आरोप
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला की पहचान लक्ष्मी के रूप में हुई है। आरोप है कि वह ऐसे मोबाइल नंबरों पर संपर्क करती थी, जिन लोगों की शादी नहीं हुई थी या जिनकी पत्नी का निधन हो चुका था।
कई दिनों तक बातचीत के जरिए कथित तौर पर विश्वास कायम करने के बाद संबंधित व्यक्ति को किराये के कमरे में मिलने के लिए बुलाया जाता था।
पुलिस का दावा है कि कमरे में पहले से हिडन कैमरा लगाया जाता था। इसके बाद निजी वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने और झूठे बलात्कार के मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर रुपये मांगे जाते थे।
₹5 लाख मांगने की शिकायत के बाद खुलासा
पुलिस के मुताबिक 20 अगस्त को देवपुरा निवासी होराम सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पांच लाख रुपये की मांग करने, निजी वीडियो वायरल करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
शिकायत के आधार पर रजपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश तेज कर दी।
मंदिर के पास से तीन गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार 21 अगस्त की सुबह कार्रवाई करते हुए लक्ष्मी, उसके पति प्रमोद उर्फ पालू और वीरेंद्र उर्फ छोटे को सिंघौली कल्लू मंदिर के पास से गिरफ्तार किया गया।
वहीं वेदप्रकाश और राजकुमार की तलाश जारी है।
पुलिस के मुताबिक अब तक इस गिरोह से जुड़े करीब पांच मामलों की जानकारी सामने आई है। इनमें कथित ब्लैकमेलिंग के जरिए रुपये वसूलने के साथ शादी के नाम पर ठगी के आरोप भी शामिल हैं।
शादी का झांसा देकर ‘दुल्हन’ बनने का आरोप
पुलिस के अनुसार जो लोग कथित प्रेमजाल में नहीं फंसते थे, उन्हें शादी कराने का प्रस्ताव दिया जाता था। आरोप है कि इसके लिए 40 से 50 हजार रुपये में शादी तय कराने की बात कही जाती थी।
इसके बाद लक्ष्मी दुल्हन बनकर संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचती थी। पुलिस का आरोप है कि मौका मिलते ही वह जेवर, नकदी और अन्य सामान लेकर रात में वहां से निकल जाती थी।
इस तरह गिरोह कथित तौर पर दो अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाता था—एक तरफ ब्लैकमेलिंग और दूसरी तरफ शादी के नाम पर ठगी।
गिरोह में किसकी क्या भूमिका?
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर गिरोह के सदस्यों की अलग-अलग भूमिकाओं की जानकारी सामने आई है।
- लक्ष्मी: पुलिस के अनुसार लोगों से संपर्क कर विश्वास कायम करने और शादी के नाम पर ठगी में मुख्य भूमिका।
- प्रमोद उर्फ पालू: लक्ष्मी का पति, जिस पर गिरोह में सहयोग करने का आरोप है।
- वीरेंद्र उर्फ छोटे: पुलिस के अनुसार शादी के बाद लक्ष्मी को वहां से निकलने में मदद करता था।
- राजकुमार और वेदप्रकाश: पुलिस के मुताबिक शादी के लिए लोगों की तलाश करते थे और फिलहाल फरार हैं।
इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।
हिडन कैमरा समेत कई सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कथित तौर पर कई सामान बरामद किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- हिडन कैमरा
- 40 हजार रुपये नकद
- दो जोड़ी पाजेब
- मंगलसूत्र
- अंगूठी
- घड़ी
- सिन्दूर की शीशी
- नेलपॉलिश और बिंदी
- लाल लहंगा-चुन्नी
- नारंगी रंग का महिला पर्स
पुलिस अब बरामद सामान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।
पति का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया
पुलिस के अनुसार प्रमोद उर्फ पालू का आपराधिक इतिहास करीब 16 साल पुराना है। उसके खिलाफ गुन्नौर और रजपुरा थानों में 2010 और 2011 में मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
पुलिस के मुताबिक इनमें हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामला भी शामिल है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस अब फरार बताए जा रहे वेदप्रकाश और राजकुमार की तलाश कर रही है। साथ ही जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और इससे जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले में सामने आए तथ्यों की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे लोगों के साथ ठगी और ब्लैकमेलिंग के इस कथित नेटवर्क ने लोगों को ऑनलाइन और फोन के जरिए होने वाली बातचीत में सतर्क रहने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। किसी भी संदिग्ध मामले में निजी जानकारी या पैसे साझा करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करना जरूरी है।


