


बिलासपुर। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 और 8 से एक महिला समेत पांच संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से करीब 24 किलो गांजा बरामद किया गया है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 12.50 लाख रुपये बताई जा रही है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद रेलवे के रास्ते होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी गांजे की खेप को ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश ले जाने की तैयारी में थे।
मुखबिर की सूचना पर पहुंची जीआरपी
जीआरपी थाना प्रभारी विष्णु यादव के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 और 8 पर कुछ संदिग्ध लोग मौजूद हैं। सूचना में उनके पास नशीले पदार्थ होने की आशंका जताई गई थी।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए जीआरपी की टीम तत्काल स्टेशन पहुंची। पुलिस ने प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद नियमानुसार तलाशी की गई।
तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में गांजा मिला। वजन करने पर कुल मात्रा करीब 24 किलो निकली। इसके बाद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
नर्मदा एक्सप्रेस से ले जाने की थी तैयारी
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी गांजे की खेप को नर्मदा एक्सप्रेस के जरिए आगे ले जाने की तैयारी में थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा बिलासपुर तक कैसे पहुंचा और इसे मध्य प्रदेश के किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रहने वाले हैं। आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही
- गांजे की खेप आरोपियों तक कहां से पहुंची?
- इसे बिलासपुर तक कौन लेकर आया?
- नर्मदा एक्सप्रेस के जरिए गांजा कहां पहुंचाया जाना था?
- इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं?
- गिरोह का मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड कौन है?
- क्या आरोपी पहले भी इसी तरह की तस्करी कर चुके हैं?
ओडिशा से मध्य प्रदेश तक फैला नेटवर्क
जीआरपी थाना प्रभारी के अनुसार, गांजा तस्करी का नेटवर्क ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए मध्य प्रदेश तक फैला होने की आशंका है। यही वजह है कि पुलिस सिर्फ गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों तक जांच सीमित नहीं रखना चाहती।
पूछताछ के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गांजे की सप्लाई के लिए रेलवे मार्ग का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था।
रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। तस्कर अक्सर यात्रियों के बीच सामान्य तरीके से सफर करते हुए नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
जीआरपी ने पांचों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बरामद गांजे को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
12.50 लाख रुपये की खेप ने बढ़ाई चिंता
करीब 24 किलो गांजे की बरामदगी और इसकी अनुमानित कीमत करीब 12.50 लाख रुपये होने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेप के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
फिलहाल पांचों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ गांजा तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।




