

बलौदाबाजार-भाटापारा। भाटापारा के टेहका रोड स्थित एक फार्म हाउस में सुअरों के बीमार पड़ने और कुछ पशुओं की मौत के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। मामले को लेकर पशुपालन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अभी तक सुअरों की मौत ‘स्वाइन फ्लू’ से होने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रारंभिक जांच में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की आशंका जताई गई है। हालांकि, बीमारी की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है। इसके लिए प्रभावित सुअरों से लिए गए नमूने राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
टेहका रोड के फार्म में मिले बीमार सुअर
मामला भाटापारा के टेहका रोड स्थित समीर ध्रुव के फार्म हाउस का है। पशुओं के बीमार होने और मौत की सूचना मिलने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम तत्काल सक्रिय हुई।
उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. नरेंद्र सिंह के मुताबिक, फार्म में सुअरों के बीमार होने की सूचना 1 सितंबर 2026 को मिली थी। सूचना मिलते ही पशु चिकित्सालय भाटापारा के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बीमार पशुओं का उपचार शुरू किया।
इसके बाद बीमार सुअरों की लगातार निगरानी की गई, ताकि बीमारी के लक्षणों और उसके संभावित प्रसार की स्थिति का आकलन किया जा सके।
7 सितंबर को लिए गए सैंपल
बीमारी की वजह पता लगाने के लिए 7 सितंबर को बीमार सुअरों के रक्तपट्टी समेत अन्य आवश्यक नमूने लिए गए। इन नमूनों को प्रारंभिक जांच के लिए जिला रोग अन्वेषण प्रयोगशाला भेजा गया।
इसके बाद जिला रोग अन्वेषण प्रयोगशाला और जिला कार्यालय की संयुक्त टीम ने संबंधित फार्म का दौरा किया। टीम ने वहां पशुओं की स्थिति का निरीक्षण करने के साथ बीमारी को लेकर आवश्यक जांच की।
बीमारी की सटीक पहचान और अंतिम पुष्टि के लिए सैंपल अब NIHSAD भोपाल भेजे गए हैं। फिलहाल संस्थान की रिपोर्ट का इंतजार है।
स्वाइन फ्लू या अफ्रीकन स्वाइन फीवर? विभाग ने बताया अंतर
सुअरों की बीमारी को लेकर ‘स्वाइन फ्लू’ और ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ के नामों से भ्रम की स्थिति बन रही थी। पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान मामले में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग के अनुसार, फिलहाल अफ्रीकन स्वाइन फीवर की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच कराई जा रही है। अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें।
विभाग के मुताबिक अहम बातें
- सुअरों की मौत की वजह अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है।
- स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है।
- प्रारंभिक स्तर पर ASF की आशंका जताई गई है।
- सैंपल जांच के लिए NIHSAD भोपाल भेजे गए हैं।
- अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की पुष्टि होगी।
- प्रभावित फार्म को क्वारंटीन किया गया है।
- एक किलोमीटर के दायरे में सुअरों और सुअर पालकों की निगरानी बढ़ाई गई है।
एक किलोमीटर के दायरे में निगरानी
एहतियात के तौर पर पशुपालन विभाग ने प्रभावित फार्म को पूरी तरह क्वारंटीन कर दिया है। इसके अलावा फार्म के आसपास एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले सुअर पालकों और उनके पशुओं की सघन निगरानी की जा रही है।
विभाग का उद्देश्य बीमारी के संभावित प्रसार को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है। फार्म से सुअरों की आवाजाही को भी नियंत्रित किया गया है।
पशु चिकित्सा विभाग की टीमें आसपास के इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी नए मामले की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
क्या इंसानों में फैलता है ASF?
पशुपालन विभाग ने लोगों को राहत देते हुए बताया है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर मनुष्यों में नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से सुअरों को प्रभावित करने वाली बीमारी है।
इसी वजह से विभाग ने लोगों से अनावश्यक डर या अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की है। हालांकि सुअर पालकों को पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अचानक मौत या बीमारी पर तुरंत दें सूचना
पशुपालन विभाग ने सुअर पालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें या अचानक उसकी मौत हो जाए तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा विभाग को दें।
समय पर जानकारी मिलने से बीमारी की जांच और संभावित संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल भाटापारा के टेहका रोड स्थित फार्म में सामने आए मामले में भोपाल स्थित NIHSAD की जांच रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर है या बीमारी की कोई अन्य वजह है।
जब तक रिपोर्ट नहीं आती, पशुपालन विभाग ने लोगों से अपुष्ट खबरों और अफवाहों से बचने तथा आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।




