
उमावाणी न्यूज
समसामयिक रुपक-
मैली चादर ओढ़ के कचरा फेंकने आऊं
“मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं।
हे पावन परमेश्वर मन ही मन शरमाऊं”। इस भजन को बालपन से सुनते आ रहा हूं,लेकिन आजकल इस भजन के बदले हुए रूप को देख रहा हूं *मैली चादर ओढ़ के द्वार तुम्हारे आऊं। अपने घर का सारा कचरा द्वार तेरे छोड़ जाऊं। मन ही मन मैं मुसकाऊं* मन के मैले लोगों को दूसरों के द्वार ही नहीं शहर भर में कचरा फैलाने में परमानंद की अनुभूति होती है।ऐसे ही ‘कचरा फेकू वाइरस’ से शहर-नगर को बचाने के लिए सरकार तुम्हारे द्वार की तर्ज पर सुबह सुबह ‘गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकालो’ गीत गाती हुई कचरा गाड़ी आ जाती है। कचरा गाड़ी का आना शुभ माना जाना चाहिए क्योंकि जिस गंदगी से हमें घीन आती है। उसी गंदगी को हमसे दूर करने गुनगुनाती हुई गाड़ी चली आती है। हमें तो मुस्कुराते हुए उसका स्वागत करना चाहिए किन्तु मेरा अनुभव है कि अनेक गृहस्वामी कचरा गाड़ी तक जाने में भी कोताही करते हैं।अधमरे अलसाए से उठते हैं और गाड़ी वाले को कोसते बड़बड़ाते हैं ‘दो मिनट चैन से बैठने भी नहीं देता, समय -बे- समय चला आता है’। आज की स्थिति बड़ी विचित्र है। जितना कचरा घर -शहर में नहीं है। उससे कहीं ज्यादा कचरा तो मनुष्य के दिल- दिमाग में भरा हुआ है। यही वजह है आज का मनुष्य दिन भर बदबूदार, मर्यादाहीन और गालियों से सराबोर बातें करता हुआ दिखता है। मैंने देखा है ऐसी अजीब सोच रखने वाले लोग भी द्वार पर आए साधुओं को, भिखारियों को लपक लपक कर दाल-चावल रुपया- पैसा आदि भरपूर दान देते हैं।
पुण्य प्राप्ति की लालसा में डूबे ऐसे लोगों के समझ में शायद यह बात नहीं आती है कि घर की गंदगी निकालने पर घर सहित तन -मन की स्वच्छता और पवित्रता कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। कूड़ा करकट भरे मन से किया हुआ दान महत्वहीन होता है। तभी तो कहा गया है *जब तक मन में छल कपट और पाप है, तब तक व्यर्थ जप- तप और पूजा पाठ है*।अनादि काल से यह बात चली आ रही है कि जहां दरिद्रता होती है वहां पर लक्ष्मी नहीं आती खतरनाक व्याधियां आती हैं।यही वजह है मानव ही नहीं जीव जंतु भी साफ सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में देखा गया है कि साफ सफाई की जिम्मेदारी घर की महिला सदस्यों पर ही होती है। इस आधार पर कह सकते हैं कि राजधानी रायपुर में एक मणिकांचन संयोग बन पड़ा है। यहां की महापौर मीनल चौबे जी हैं। यह मणिकांचन संयोग दमखम के साथ भरोसा जगा रहा है कि शहर की सफाई अब और बेहतर हो सकेगी। इस भरोसे पर शहर की बहुरानी महापौर मीनल चौबे जी ने मुहर लगा दी है।पिछले दिनों मीडिया के माध्यम से यह खुश खबरी मिली है कि सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा- करकट फेंकने वालों पर निगरानी रखने के लिए डेढ़ सौ से अधिक स्थानों पर हाईटेक नाईट विजन कैमरे लगाने की पहल नगर निगम ने की है। भगवान भोलेनाथ की तीसरी आंख की तरह ए कैमरे कचरा फेंकुओं पर बारिक नज़र रखेंगे। खुले में कचरा फेकू व्यक्ति, वाहन मालिकों को कैमरे के फुटेज के आधार पर चिन्हित करके आर्थिक दण्ड दिया जावेगा। इन हाइटेक कैमरे के माध्यम से केवल आमजनों पर ही नहीं बल्कि निगम की कचरा कलेक्शन गाड़ियों की निगरानी भी हो सकेगी। इससे कचरा परिवहन की व्यवस्था चाक चौबंद बनी रहेगी।यह भी याद रखना होगा कि घर हो या शहर उसे स्वच्छ रखने की पहली जवाबदारी वहां के निवासियों की ही होती है। ऐसे नैतिक दायित्व का आदर्श उदाहरण मैंने थाईलैंड के बैंकॉक शहर में देखा। एक थाई महिला अपने पालतू डॉगी को लेकर सड़क के किनारे किनारे घूम रही थी। बेहद साफ सुथरी सड़क,हरियाली से मैं मोहित था। इसीलिए डॉगी लेकर सड़क में घूमती हुई महिला की मंशा और डागी की हरकत मुझे चुभने लगी। मुझे रायपुर याद आ गया। जहां की भद्र पुरुष- महिलाएं अपने डॉगी को कहीं भी पाटी करवा देते हैं। जेहन में इसी गंदी सोच को रखे हुए मैं उस थाई महिला के अगले कदम की प्रतीक्षा में था। तभी मैंने देखा जब डागी पॉटी करने की स्थिति में आया तो उस महिला ने अपने हाथ में पकड़े अखबार को तत्काल नीचे रख दिया। बाद में डॉगी की पाटी को अखबार में लपेटे कर उसने बड़े डस्टबिन में फेंक दिया। उस महिला और समझदार डॉगी की सराहना मैने की तो वे बोली – थैंक्यू सर, बट इट इज़ अवर ड्यूटी।
इसी तरह श्रीलंका यात्रा की एक घटना याद आ रही है।शहर के बाहर से हमारी टैक्सी गुजर रही थी। तभी डायबिटिक पीड़ित हमारे एक वृद्ध मित्र असहनीय लघुशंका से बेचैन हो उठे थे। गाड़ी रुकवा कर सड़क किनारे ओट में जाकर ज्यों ही वे लघुशंका से निवृत्त हुए। धड़धड़ाती हुई पुलिस वैन आ गई और उन पर कानूनी कार्रवाई करने उतारू हो गई।घबराए हुए हम सबने बड़ी मिन्नत की,उनकी उम्र और बीमारी की जानकारी देते हुए क्षमा याचना की तो वार्निंग देकर उन्होंने हमें छोड़ा। इन घटनाओं से तो यही लगता है कि हरेक नागरिक और प्रशासन को अपने दायित्व निर्वहन के लिए सजग रहने की नितांत आवश्यकता है।
विजय मिश्रा ‘अमित’
अग्रोहा कालोनी रायपुर (छग)