
उमावाणी न्यूज

छत्तीसगढ़ी भाषा छात्र संगठन के तत्वाधान में राजधानी स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मूर्ति के सामने 26 वर्ष के युवा छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी भाषा का स्थान, विस्तार के ऊपर हुआ चर्चा
राज्योत्सव के उपलक्ष्य 1 नवम्बर को छत्तीसगढ़ी भाषा छात्र संगठन ने छत्तीसगढ़ महतारी सामने इकठ्ठा होकर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें 26 साल में छत्तीसगढ़ी भाषा का स्थान और योगदान के ऊपर चर्चा कर वर्तमान परिस्थित में छत्तीसगढ़ी की सार्थकता पर प्रकाश डाला गया, कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की आरती वंदना से हुई जिसमें गोष्ठी के मुख्य अतिथि और छत्तीसगढ़ी राज भाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्रा,विशिष्ट अतिथि डॉ उदय भान सिंह चौहान राज्य आंदोलन के पुरोधा, और प्रख्यात साहित्यकार कलमकार रमा जोशी प्रभा जोशी रेखा जोशी, रामेश्वर शर्मा उपस्थि रहे l आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बन तो गया है लेकिन क्या छत्तीसगढ़ी का सम्मान राज्य में बना है…. आज 26 साल बाद भी छत्तीसगढ़ी भाषा को पढ़ाई लिखाई और रोजगार में स्थापित करने के लिए अनशन, सत्याग्रह, आंदोलन करना पड़ रहा है इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा l डॉ उदय भान सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ी हमारी अस्मिता और संस्कृति का परिचायक है बिन छत्तीसगढ़ी राज्योत्सव मना रहे हैं यह हमको पीढ़ा दे रहा है सरकार राज्योत्सव के अवसर पर कक्षा 1 से 12 वी तक पढ़ाई लिखाई और छत्तीसगढ़ी भाषा डिग्री धारी छात्रों के लिए रोजगार की घोषणा करे तब जाकर राज्योत्सव की सार्थकता होगी l रमा जोशी ने सरकार से निवेदन करते हुए कहा कि छत्तीसढ़ी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही लेकिन स्कूली शिक्षा से गायब है यह तो ऐसे ही हुआ कि दुकान खोल दिए हैं लेकिन खरीदार नहीं है उन्होंने भी कहा कि अविलंब पहेली से 12 वी छत्तीसगढ़ी भाषा को लागू करे l प्रख्यात साहित्यकार रामेश्वर शर्मा ने सरकार और राजभाषा आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जहां की 66% अबादी छत्तीसगढ़ी भाषी है वहां के बच्चा अपनी मातृ भाषा में शिक्षा से वंचित है, छत्तीसगढ़ कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक सी एल दुबे ने भी छात्रों की मांगों को जायज ठहराते हुए अविलंब लागू करने की मांग की कार्यक्रम के अंत में छत्तीसगढ़ी भाषा छात्र संगठन के प्रमुख जीतेन्द्र कुमार साहू ने कहा आज हमारे पास विकास का पैमाना क्या है? हमारी मातृ भाषा में न तो शिक्षा है और न ही कोई रोजगार है फ़िर विकसित छत्तीसगढ़ 2047 की कल्पना कैसे करें बिना भाषा के कोई राज्य की जनता का विकास हुआ है… आगे कहा कि जानवर की भी अपनी भाषा होती है लेकिन हमारी भाषा जो कि राजभाषा बन चुकी है फिर राज्य की जनता की भाषा नहीं बनी है बिन पैसा का छत्तीसगढ़ी भाषा को विलुप्त होने से कोई नहीं बचा पाएगा आज गांव गांव में अनपढ़ व्यक्ति भी अपने बच्चे को अंग्रेजी में शिक्षा देना चाहते हैं इसका प्रमुख कारण है आर्थिक रूप से जुड़ा होना जब छत्तीसगढ़ी भाषा भी आर्थिक रूप से जुड़ जाएगा छत्तीसगढ़ी बोलने, पढ़ने, में कोई नहीं शरमायेगा जब तक छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा और रोजगार सुनिश्चित नहीं होगा हम अनवरत लड़ते रहेंगे और सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 28 (राज भाषा दिवस)नवंबर के पहले अगर 1 से 12 वी तक पढ़ाई लिखाई के लिए आदेश जारी नहीं हुआ तो एक बड़ा आंदोलन छात्र संगठन करेगा जिसके लिए सरकार जिम्मेदार होगा इस विचार गोष्ठी का समापन छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्य सुआ के साथ हुआ जिसमें आदित्य बघेल, देवेंद्र साहू, राहुल वर्मा, ऋचा वर्मा, सहित बड़ी संख्या में छात्र संगठन के बच्चे, वि वि महाविद्यालय संघ के छात्र, और छत्तीसगढ़ी प्रेमी उपस्थित रहे l