छत्तीसगढ़

डीएव्ही पब्लिक स्कूल पांडवपारा में नर्सरी कक्षा संचालित न होने से अभिभावक नाराज

नई शिक्षा नीति लागू होते ही लोगों में असमंजस की स्थिति बरकरार

सूरजपुर/ कोरिया/ पांडवपारा कॉलरी/ भैयाथान। एसईसीएल द्वारा संचालित डीएवी पब्लिक स्कूल में नई शिक्षा नीति लागू होते ही नर्सरी कक्षा में दाखिले की उम्र बदल गई।अब तीन से चार वर्ष के बच्चे नर्सरी,चार से पांच वर्ष के एलकेजी व पांच से छह वर्ष उम्र के बच्चे यूकेजी में पढ़ेंगे। लेकिन पांडवपारा स्थित डीएवी स्कूल में इस साल नर्सरी बाल वाटिका की कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई जिसके कारण तीन से चार वर्ष के बच्चो का प्रवेश नही हो पा रहा है बल्कि अब 4 से 5 वर्ष के बच्चो का प्रवेश एलकेजी में किया जा रहा है। बताया जाता है इसके लिए भवन सहित अन्य व्यवस्थाएं व शिक्षण सहायक सामग्री भी नहीं है जिसके चलते नर्सरी की कक्षाएं संचालन में इस वर्ष दिक्कत है। जिसके चलते इस सत्र में विद्यालय के प्रारंभिक कक्षा एलकेजी में 4 से 5 वर्ष के बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है।जिससे 3 से 4 वर्ष के बच्चों का नर्सरी बाल वाटिका में दाखिला नहीं मिलने से अभिभावक निराश व चिंतित हैं।
 सीबीएसई पाठ्यक्रम के विद्यालयों में प्रवेश की प्रकिया इन दिनों शुरू हो गई है।पांडवपारा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में नर्सरी बाल वाटिका इस सत्र में शुरू नहीं हो पाई है। बताया जाता है इस विद्यालय में बाल वाटिका के लिए सिर्फ भवन ही समस्या नहीं,बल्कि शिक्षक,शिक्षण सामग्री,खिलौने सहित  कई समस्याएं है।नर्सरी कक्षा संचालन हेतु एसईसीएल प्रबंधन ने समय रहते व्यवस्था बहाल हेतु कोई तैयारी नही की जिसके चलते नर्सरी कक्षा का संचालन इस सत्र में नही हो सकेगा। जिसका खामियाजा अभिभावक भुगत रहे हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं। इस कड़ी में नर्सरी की अब तीन कक्षाएं होंगी।पांडवपारा में संचालित डीएवी स्कूल में पहले 3 से 4 वर्ष के बच्चे एलकेजी में प्रवेश पाते थे लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होते ही अब नर्सरी में प्रवेश पाएंगे। लेकिन नर्सरी क्लास संचालित नहीं हो पाई बल्कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वर्तमान सत्र में 4 से 5 वर्ष के बच्चे को एलकेजी में प्रवेश दिया जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर प्रवेश फार्म भी बांट दिया गया है। लेकिन नर्सरी में प्रवेश हेतु कोई क्रियाकलाप नही है।
*नर्सरी की तर्ज पर बाल वाटिका में बच्चों को दिया जाना है प्रवेश*
सीबीएसई पाठ्यक्रम के प्रारंभिक कक्षा अब नर्सरी बालवाटिका हो गई है। शेष कक्षाओं में पिछली कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को ही दाखिला दिया जाता है। किसी विद्यार्थी द्वारा स्कूल छोड़ने के कारण सीट रिक्त होने की स्थिति में ही नए स्टूडेंट्स को प्रवेश दिया जाता है।
*बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं होंगी*
नई शिक्षा नीति अनुसार नर्सरी बाल वाटिका के लिए स्कूलों को विशेष रूप से कक्षाएं आरक्षित रखनी होंगी। इन्हें बाल मनोविज्ञान के अनुसार डिजाइन किया जाएगा। इसमें बच्चों के लिए खिलौने सहित ऐसी चीजें भी होंगी, जिनके माध्यम से वे खेल-खेल में सीख सकें। कक्षा की दीवारों को भी रंग रोगन के साथ सजाया जाना है जिससे बच्चे देखकर सीखे।
*राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रावधान*
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके पूर्व छात्रों को तीन वर्ष नर्सरी कक्षाओं में अध्ययन करना होगा। नर्सरी, पीपी 1और पीपी 2 की तर्ज पर ही डीएवी में नर्सरी,एलकेजी और यूकेजी की शुरुआत की गई है। सत्र 2023-24 में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में इसे देश के चुनिंदा विद्यालयों में लागू किया गया था। नर्सरी प्रारंभ किए जाने के पूर्व तक डीएवी विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रारंभिक कक्षा,एलकेजी थी।

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