7 अप्रैल को विश्व के सभी देशो के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी विचार -विमर्श करने के लिए एक संगठन बनाया गया। जिसका नाम है विश्व स्वास्थ्य संगठन

उमा वाणी न्यूज रायपुर
आज विश्व स्वास्थ्य दिवस
7 अप्रैल को विश्व के सभी देशो के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी विचार -विमर्श करने के लिए एक संगठन बनाया गया। जिसका नाम है विश्व स्वास्थ्य संगठन
(WHO) इस संगठन के सदस्य देशो की संख्या 193 है। इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना दिवस 7 अप्रैल को ही विश्व स्वास्थ्य दिवस मानाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य दिवस है जिसे स्वास्थ्य जगरूकता दिवस भी बोल सकते है (WHO) विश्व स्वास्थ्य संगठन अनेक मुद्दो पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाती है. WHO पिछले वर्षों में कोरोना काल में अनेक खतरों के बारे में जागरूकता लाने का काम किया और इस संबंध में उसके बचाव के लिए अनेक गाइड लाईन भी जारी किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय स्वितजर देश के जिनेवा शहर में स्थित है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को उनके सेहत प्रति, जागरूक करना है। विश्व में सबसे अधिक मधुमेह के मरीज है. यह रोग अनवांशिक के साथ साथ अनियमित दिनचर्या के कारण फैल रहा है यह रोग जितना विकसित क्षेत्र है जैसा विकास दर बढ़ता है, सुविधाएँ बढ़ती है उस देश में उस क्षेत्र यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 के स्वास्थ शुरूआत आशाजनक भविष्य की थीम पर जागरूकता लाई जायेगी। स्वस्थ माताएँ और बच्चे, आज विश्व स्वास्थय दिवस का मूल उद्देश्य है। समाजिक विकास और भलाई भी मूलरूप से माताएँ और बच्चे के स्वास्थ्य पर निर्भर है इसी कारण मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ पर एक साल (वर्ष) तक चलने वाले अभियान की शुरूआत होगी। इस अभियान के तहत सरकारो और स्वास्थ समुदाअयो से आग्रह किया जायेगा कि वे रोके जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को रोकने के जिए प्रयास तेज करे तथा महिलाओ के दीर्घकालीन स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक कार्य योजना बनाकर उनको प्राथमिकता दे।
नवजात के स्वस्थ भविष्य निर्माण के लिए कार्य करें। आज का नवजात ही कल का उज्जवल भविष्य तय करेगा।
स्वस्थ और प्रकृति का गठजोड़ होता है। पहले हम प्रकृति के बहुत करीब रहते थे. आज हम प्रकृति पर्यावरण से दूर होते जा रहे है. प्रकृति का दोहन ज्यादा हो रहा है। और सुविधाएँ बढ़ रही है इससे शारीरीक कार्य क्षमता कमजोर हो रही है हर क्षेत्र में तकनीकी विकास का उपयोग हो रहा है। इससे शरीर मी कमजोर हो रहा है। इससे कई प्रकार की बीमारियों शरीर को जकड रही है. और पर्यावरण का दोहन भी भरपूर हो रहा है, इससे शुद्ध वातावरण भी नहीं मिल पा रहा है।
पहले बहुत से धार्मिक आयोजनाओं में पर्यावरण से जुड़े बहुत से कार्य सम्पन्न होते थे. आज उनकी जगह नकली और प्लास्टिक से बने वस्तुओं का उपयोग हो रहा है। प्रकृति की पूजा और कई आयोजन अब कम हो रहे है। आज के युवा पेड़ के महत्व और नाम तक को नहीं जानते, वातानुकुलित हवाएँ चाहिए, प्राकृतिक हवाएँ नहीं। ऐसा सोच विचार चिंतनीय है. इससे स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है, ऐसे मे शरीर को कहाँ तक स्वास्थ रख सकते है। यह भी एक विचारणीय हैं।
हम शरीर से मेहनत, परिश्रम करने की आदत डाले और प्रकृति से जुड़े यही स्वस्थ शरीर का मूलमंत्र है।
शेषनारायण सोनी