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क्षमा का प्रभाव ही सौम्यता का गुण है: श्री हंसकीर्ति श्रीजी

आत्मोत्थान चातुर्मास 2025

रायपुर। श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी में आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत आयोजित प्रवचनमाला में शनिवार को परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने धर्मरत्न प्रकरण ग्रंथ का वाचन करते हुए जीवन में क्षमा का भाव ही सच्ची सौम्यता का परिचायक है। जो व्यक्ति अपने व्यवहार में क्षमा को अपनाता है, उसका आचरण स्वतः ही कोमल, मधुर और विनम्र बन जाता है। किसी भी परिस्थिति में आवेश या क्रोध में आ जाना व्यक्ति की कमजोरी को दर्शाता है, जबकि धैर्य और नम्रता संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

प्रवचन के दौरान पूज्य श्रीजी ने एक भावपूर्ण प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि एक सेठजी को अपने रिश्तेदार के घर आयोजित समारोह का निमंत्रण नहीं मिला, फिर भी उन्होंने अपने पुत्र के साथ वहां जाने का निर्णय लिया। समारोह स्थल पर उनका भतीजा अन्य अतिथियों का स्वागत कर रहा था, लेकिन अपने चाचा को देख अनदेखा कर दूर हट गया।

भोजन के समय अपमान की पराकाष्ठा तब हुई जब भतीजे ने जानबूझकर सेठजी की थाली में पत्थर रख दिया। यह देखकर उनका पुत्र क्रोधित होकर उठ खड़ा हुआ, लेकिन सेठजी ने उसे शांत रहने का संकेत दिया और स्वयं धैर्यपूर्वक बैठे रहे। कुछ ही देर में भतीजे को अपनी गलती का बोध हुआ और वह पश्चात्ताप के साथ चाचा के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगा।

पूज्य श्रीजी ने इस प्रसंग के माध्यम से समझाया कि धैर्य और क्षमा का फल सदैव सकारात्मक होता है। अपमान का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि सौम्यता से दिया जाए, तभी सच्ची विजय प्राप्त होती है।

साध्वी श्रीजी ने भी एक प्रेरणादायी प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि मुनिराज वर्षों की कठिन तपस्या और संयम से अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। भले ही कठोर व्रतों के कारण उनका शरीर दुर्बल हो जाए, लेकिन उनका आत्मबल और संयम उन्हें मानसिक रूप से दृढ़ बनाए रखता है।

साध्वी जी ने कहा कि चिंता से नींद जल्दी टूट सकती है, पर कल्पना का ऐसा प्रभाव नहीं होता। एक बार एक मुनिराज सुग्राम नगर पहुंचे और शिवालय के समीप रुकने का विचार किया। वहां स्थानीय महिलाओं से हुई बातचीत में भी उनके संयम, सरलता और शालीनता का परिचय स्पष्ट झलकता था।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने बताया कि दादाबाड़ी में सुबह 8.45 से 9.45 बजे साध्वीजी का प्रवचन होगा। आप सभी से निवेदन है कि जिनवाणी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

*27 दिवसीय दादागुरुदेव इकतीसा 9 अगस्त तक*

धर्म की नगरी रायपुर के श्री जिनकुशल सूरी जैन दादाबाड़ी तीर्थ में आत्मोत्थान वर्षावास 2025 के अंतर्गत 27 दिवसीय दादा गुरुदेव इकतीसा जाप का आयोजन 14 जुलाई से 9 अगस्त तक किया जा रहा है। प्रतिदिन रात्रि 8.30 बजे से 10.30 बजे तक श्री जिनकुशल सूरी जैन दादा बाड़ी, एम जी रोड, रायपुर में जाप होगा। प्रतिदिन चांदी के चरण कमल ड्रा के साथ सोमवार, अमावस्या व पूनम को बंफर ड्रा भी रखा गया है। यह आयोजन ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्मोत्थान चातुर्मास समिति रायपुर के सान्निध्य में तथा अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद रायपुर के संयोजन में सम्पन्न हो रहा है।

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