महायुति में बढ़ी तकरार? नवी मुंबई एयरपोर्ट कार्यक्रम के निमंत्रण से उठे सवाल, शिंदे की अनदेखी पर सियासत गरम

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में एक बार फिर राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के निमंत्रण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री Eknath Shinde का नाम कथित तौर पर शामिल नहीं होने से गठबंधन के भीतर मतभेदों की अटकलें लगाई जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की 20 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
विवाद तब खड़ा हुआ जब दावा किया गया कि कार्यक्रम के निमंत्रण में एकनाथ शिंदे का नाम शामिल नहीं था। शिंदे समर्थकों ने इसे सामान्य प्रशासनिक चूक के बजाय राजनीतिक अनदेखी के रूप में देखा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी प्रमुख एजेंसी CIDCO शहरी विकास विभाग के अधीन आती है, जिसका प्रभार एकनाथ शिंदे के पास है।
ऐसे में समर्थकों का कहना है कि परियोजना से सीधे जुड़े मंत्री का नाम निमंत्रण सूची में नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
महायुति में दरार की अटकलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में महायुति के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इस नए विवाद ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ पूरी तरह सामान्य नहीं है।
हालांकि अब तक किसी भी सहयोगी दल की ओर से गठबंधन में मतभेद की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगा जवाब
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि निमंत्रण सूची में यह स्थिति कैसे बनी।
इस कदम को विवाद को शांत करने और गठबंधन के भीतर संभावित असहजता को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सुनेत्रा पवार का नाम भी चर्चा में
रिपोर्टों के मुताबिक उपमुख्यमंत्री Sunetra Pawar का नाम भी अतिथि सूची में नहीं था। इससे कार्यक्रम की तैयारियों और निमंत्रण प्रक्रिया को लेकर और अधिक सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि आयोजकों की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा
इस विवाद के सामने आने के बाद विपक्षी दलों को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। विपक्ष का कहना है कि यदि गठबंधन के प्रमुख नेताओं के बीच समन्वय में कमी दिखाई देती है तो इसका असर प्रशासनिक निर्णयों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की निगाहें आयोजकों के स्पष्टीकरण और महायुति के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि मामला केवल निमंत्रण संबंधी चूक साबित होता है तो विवाद जल्द शांत हो सकता है, लेकिन यदि राजनीतिक संकेतों की बात सही साबित होती है तो आने वाले समय में गठबंधन की राजनीति पर इसका असर दिखाई दे सकता है।




