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देश के 315 जिलों पर कमजोर मानसून का खतरा, सरकार तैयार, किसानों को कम पानी वाली फसलों की सलाह: शिवराज

नयी दिल्ली, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून की चाल पर असर पड़ा है और देश में अब तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश हुई है और दो जुलाई तक की जानकारी के अनुसार आगे भी मानसून के कमजोर रहने के आसार हैं। सरकार इस स्थिति से निपटने को तैयार है तथा आकस्मिक योजना तैयार कर ली गयी है।

श्री चौहान ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि स्थिति की समीक्षा के लिए राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और संभावित रूप से प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक की गयी और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की श्रेणी में आंका गया है। सरकार ने इन जिलों को उनकी सिंचाई व्यवस्था के आधार पर प्राथमिकताओं में बांटा है। इनमें विशेष प्राथमिकता वाले 111 जिले हैं। ये ऐसे संवेदनशील जिले हैं, जहां सिंचाई की व्यवस्था केवल 25 प्रतिशत क्षेत्र में ही उपलब्ध है। सरकार का पूरा ध्यान सबसे पहले इन्हीं जिलों पर है। इसके बाद मध्यम प्राथमिकता वाले जिलों की 76 है। इन जिलों में केवल 25 से 50 प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा है जबकि निम्न प्राथमिकता वाले जिले 128 है। इनमें सिंचाई की बेहतर व्यवस्था मौजूद है, इसलिए इन्हें कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।कृषि मंत्री ने सभी प्रभावित जिलों के प्रशासन को स्थानीय स्तर पर बनी आकस्मिक योजनाएं सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी परिस्थिति में किसानों के खेत खाली न रहने पायें।

उन्होंने किसानों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें, बल्कि खेतों में पर्याप्त नमी और कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर बारिश होने के बाद ही बिजाई का काम शुरू करें। इसके अलावा कम पानी में उगने वाली, कम अवधि की फसलों और मोटे अनाज तथा दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए कहा गया। श्री चाैहान ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश में खाद-बीज की कोई कमी नहीं है। देश में बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी।

अल नीनो के कारण मानसून पर आये संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन को मुख्य संयोजक की भूमिका में रहने को कहा गया है। सभी राज्यों को अपने यहां नियंत्रण कक्ष बनाने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिये गये हैं। वे केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी और वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और ग्रामीण मौसम इकाइयों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। इसके साथ ही, संभावित चारा संकट से निपटने के लिए पशु चारे की व्यवस्था और भंडारण पर भी विशेष चर्चा की गयी।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने और अधिक से अधिक किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाने के निर्देश दिये हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत वित्तीय ऋण या मुआवजा मिल सके।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि राहत की बात यह है कि देश में अब तक एक करोड़ 19 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल की इसी अवधि (1 करोड़ 17 लाख 50 हजार हेक्टेयर) से अधिक है। विशेष रूप से धान का बुवाई क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले बेहतर चल रहा है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मुख्य रूप से सोयाबीन की बुवाई को लेकर चिंता जतायी। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने देशवासियों को भरोसा देते हुए कहा कि कमजोर मानसून की आशंका के बावजूद देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है। सरकार के पास पर्याप्त भंडारण है और किसी भी संकट से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गयी है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि मौसम के पूर्वानुमान और वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही खेती के कार्य करें।

उन्होंने कहा कि कमजोर मानसून की आशंका के बावजूद देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत है। पर्याप्त भंडारण और बेहतर तैयारी के कारण किसी संकट की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने मंडी और खुदरा कीमतों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती बरतने को कहा गया है।

श्री चौहान ने बताया कि केंद्र, राज्य, जिला और गांव स्तर पर समन्वय के लिए मल्टी-लेयर सिस्टम बनाया गया है। ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। श्री चौहान ने जल संरक्षण को सबसे अहम बताया है। उन्होंने तालाब, चेक डैम, खेत-तालाब जैसी संरचनाओं को मजबूत करने और मनरेगा के तहत पानी से जुड़े काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। पीने के पानी को प्राथमिकता देने को भी कहा गया है।

श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार पहले से तैयारी कर रही है और सभी संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि घबराएं नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सलाह के अनुसार तैयारी करें और इस चुनौती को अवसर में बदलें।

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