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14 किलो वजन घटाकर राजस्थान की बेटी ने रचा इतिहास, अब चीन से जापान तक लहराएगी भारत का तिरंगा

राजस्थान के खेल जगत के लिए गर्व की खबर सामने आई है। कोटा की रहने वाली वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने अपने शानदार प्रदर्शन और कड़ी मेहनत के दम पर इतिहास रच दिया है। वह राजस्थान की पहली महिला वुशु खिलाड़ी बन गई हैं, जिनका चयन एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ है।

यह उपलब्धि केवल एक चयन नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का परिणाम है। अब दिव्यांशी की नजर एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने पर है।

14 किलो वजन घटाकर बदली अपनी किस्मत

दिव्यांशी की सफलता के पीछे उनकी मेहनत और समर्पण की एक प्रेरणादायक कहानी छिपी है। शुरुआत में उनका वजन लगभग 74 किलोग्राम था, जबकि जिस वर्ग में उन्हें प्रतिस्पर्धा करनी थी, उसके लिए निर्धारित वजन काफी कम था।

ऐसे में उन्होंने चुनौती को स्वीकार किया और कठिन प्रशिक्षण, नियंत्रित आहार और अनुशासित दिनचर्या के जरिए अपना लगभग 14 किलोग्राम वजन कम किया।

यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।

ट्रायल में दिग्गज खिलाड़ियों को दी चुनौती

श्रीनगर में आयोजित अंतिम चयन ट्रायल में दिव्यांशी ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने देश की कई अनुभवी और स्थापित खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी और अपने दमदार खेल से चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।

उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत के सामने अनुभव भी पीछे छूट सकता है।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

दिव्यांशी की सफलता में उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है। उनकी माता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उनके पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं।

परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला दिया।

चीन में होगा अगला बड़ा इम्तिहान

एशियन गेम्स से पहले दिव्यांशी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वह चीन के हुबेई प्रांत में आयोजित होने वाली वुशु चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी।

इसके बाद उन्हें चीन में विशेष प्रशिक्षण शिविर का भी हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा, जहां वे दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के बीच अपनी तैयारी को और मजबूत करेंगी।

12 स्वर्ण पदकों से चमक चुका है करियर

दिव्यांशी अब तक अपने खेल करियर में 12 स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनकी उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि वे लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करती रही हैं और बड़े मंचों पर खुद को साबित करने की क्षमता रखती हैं।

उनकी सफलता राजस्थान के साथ-साथ देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है।

अब जापान में होगी नजरें

अब पूरे राजस्थान और देश की निगाहें एशियन गेम्स पर टिकी हैं, जहां दिव्यांशी भारत के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

यदि वह अपने इसी प्रदर्शन को जारी रखती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत को वुशु में नई पहचान दिलाने वाली प्रमुख खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल हो सकता है।

दिव्यांशी की यह कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

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