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ED का बड़ा एक्शन: एक्साइज विभाग के एडिशनल कमिश्नर वाई. मंजूनाथ के 6 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय ने एक्साइज विभाग के एडिशनल कमिश्नर वाई. मंजूनाथ से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। यह कार्रवाई कथित अवैध संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच के तहत की जा रही है।

ED की बड़ी कार्रवाई से कर्नाटक में मची हलचल

कर्नाटक में बुधवार सुबह उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने एक्साइज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वाई. मंजूनाथ के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी को शुरुआती स्तर पर कुछ ऐसे दस्तावेज और जानकारियां मिली थीं, जिनके आधार पर तलाशी अभियान चलाने का फैसला लिया गया।

छह स्थानों पर एक साथ हुई कार्रवाई

ED की टीम ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कुल छह स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • मैसूर के कुवेम्पु नगर स्थित आवास
  • बेलगाम में दूरदर्शन केंद्र के पास स्थित मकान
  • विजयनगर जिले के हरपनहल्ली तालुक के अरासिकेरे गांव स्थित संपत्तियां
  • संबंधित कार्यालय और अन्य जुड़े परिसर

अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

राजनीतिक कारणों से भी चर्चा में मामला

वाई. मंजूनाथ केवल एक वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं बल्कि राज्य की राजनीति से जुड़े एक चर्चित परिवार से भी संबंध रखते हैं। वे कथित तौर पर सतीश जारकीहोली के रिश्तेदार बताए जाते हैं, जिसके चलते यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।

इसके अलावा वे पूर्व सांसद वाई. देवेंद्रप्पा के पुत्र हैं।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं मंजूनाथ

यह पहली बार नहीं है जब वाई. मंजूनाथ किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दायरे में आए हैं। वर्ष 2012 में भी जब वे एक्साइज विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे, तब उनके खिलाफ लोकायुक्त द्वारा कार्रवाई की गई थी।

हालांकि उन मामलों में आगे क्या निष्कर्ष निकले थे, यह अलग जांच का विषय रहा है।

दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड की हो रही जांच

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अधिकारी की घोषित आय और संपत्तियों के बीच कोई असमानता तो नहीं है।

इसके लिए निम्न पहलुओं की जांच की जा रही है—

  • बैंक लेन-देन
  • संपत्ति से जुड़े दस्तावेज
  • निवेश और वित्तीय रिकॉर्ड
  • इलेक्ट्रॉनिक डेटा और डिजिटल दस्तावेज

अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी

महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यह केवल जांच और तलाशी की कार्रवाई है। ED की ओर से अभी तक किसी प्रकार का आधिकारिक निष्कर्ष या आरोपपत्र जारी नहीं किया गया है।

ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या आरोप तय किए जाते हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजर ED की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो एजेंसी आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

फिलहाल कर्नाटक के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

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