
भिलाई। छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई और भारतीय सेना के तकनीकी संस्थान 506 Army Base Workshop के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
यह MoU 8 जुलाई 2026 को IIT भिलाई परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ। इस अवसर पर IIT भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश और 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के कमांडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रिगेडियर टी. ए. अरविंद मौजूद रहे।
रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में होगा संयुक्त काम
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच तकनीकी ज्ञान, शोध और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। इसके तहत फैकल्टी सदस्य, तकनीकी कर्मचारी और रिसर्च स्कॉलर्स मिलकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम करेंगे।
MoU के तहत जिन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है, उनमें शामिल हैं—
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML)
- रोबोटिक्स और ऑटोमेशन
- सेंसर तकनीक
- एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग
- मटेरियल साइंस
- सरफेस इंजीनियरिंग
- डिजाइन और एनालिसिस
- मैन्युफैक्चरिंग एवं टेस्टिंग
- रिपेयर और री-मैन्युफैक्चरिंग तकनीक
इन क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे, जिससे रक्षा उपकरणों और तकनीकी समाधानों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
छात्रों को भी मिलेगा बड़ा अवसर
इस समझौते से IIT भिलाई के छात्रों और शोधार्थियों को रक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा। छात्रों के लिए इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट वर्क और रिसर्च अनुभव के नए रास्ते खुलेंगे।
इसके अलावा तकनीकी वर्कशॉप, सेमिनार, विशेषज्ञ व्याख्यान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
MoU के तहत सेना के अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। इससे आधुनिक तकनीकों के उपयोग और कौशल विकास में सहायता मिलेगी।
वहीं IIT भिलाई के विशेषज्ञ रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान विकसित करने में सहयोग करेंगे।
संस्थागत सहयोग को मिलेगी मजबूती
IIT भिलाई और 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के बीच यह साझेदारी शिक्षा, अनुसंधान और रक्षा तकनीक के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोग से देश में स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। यह समझौता आने वाले समय में नए शोध, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों की नींव रख सकता है।




