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लोकसभा में बृजमोहन की बड़ी मांग! ग्रामीण इलाकों के लिए बने ‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’, डॉक्टरों की कमी दूर करने की उठाई आवाज

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की लोकसभा में उठी बड़ी मांग

रायपुर/नई दिल्ली। रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने देशभर के गांवों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए ‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’ (Indian Medical Service Commission) के गठन की मांग की।

लोकसभा में नियम 377 के तहत अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समर्पित चिकित्सा सेवा कैडर की आवश्यकता है।


गांवों में डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश के लगभग 6.4 लाख गांवों में रहने वाली बड़ी आबादी आज भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह लाभान्वित नहीं हो पा रही है।

उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में—

  • सर्जन के कई पद खाली हैं।
  • बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है।
  • स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
  • अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी भारी कमी बनी हुई है।

इस कारण ग्रामीण मरीजों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।


छत्तीसगढ़ की स्थिति का भी किया उल्लेख

लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 19,698 गांवों में बड़ी संख्या आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों की है, जहां—

  • भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं।
  • स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद कम है।
  • लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी ग्रामीण जनता के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।


‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’ क्यों जरूरी?

सांसद ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई चिकित्सक ग्रामीण सेवा को केवल अनिवार्य जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं।

उनके अनुसार प्रस्तावित भारत चिकित्सा सेवा आयोग निम्नलिखित कार्य कर सकता है—

  • डॉक्टरों की राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती।
  • विशेषज्ञ चिकित्सकों का प्रशिक्षण।
  • वैज्ञानिक और पारदर्शी पदस्थापना।
  • ग्रामीण सेवा का प्रभावी प्रबंधन।
  • दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित चिकित्सकीय उपलब्धता सुनिश्चित करना।

उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक मजबूत और व्यवस्थित हो सकेगी।


ग्रामीण सेवा को बनाना होगा आकर्षक

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि केवल नियुक्तियां पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करने वाले डॉक्टरों को—

  • सम्मान मिले।
  • बेहतर करियर अवसर मिलें।
  • सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
  • प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था विकसित की जाए।

उन्होंने कहा कि जब डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, तब वे स्वेच्छा से गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने के लिए आगे आएंगे।


आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

सांसद ने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर अलग चिकित्सा सेवा कैडर बनाया जाता है, तो—

  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड
  • ओडिशा

जैसे राज्यों के आदिवासी, वनांचल और दूरस्थ इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

इससे ग्रामीण मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।


केंद्र सरकार से की सकारात्मक पहल की अपील

बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि आदिवासी, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत चिकित्सा सेवा आयोग के गठन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समान रूप से उपलब्ध हो सकें।

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