आपत्तिजनक मैसेज और ब्लैकमेल केस में हाईकोर्ट सख्त! जमानत खारिज, आरोपी की मानसिक जांच के आदेश
अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

प्रयागराज। अश्लील तस्वीरों के जरिए कथित ब्लैकमेल और आपत्तिजनक संदेश भेजने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसकी मानसिक स्थिति की मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के कथित सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया कहा कि उसका व्यवहार सामान्य मानसिक स्थिति का प्रतीत नहीं होता। इसी आधार पर मेडिकल बोर्ड से उसकी मानसिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिए जांच के निर्देश
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), कौशांबी को आरोपी की मानसिक स्थिति का परीक्षण कराने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि—
- आरोपी की मानसिक जांच कराई जाए।
- जांच रिपोर्ट संबंधित जिला अदालत में प्रस्तुत की जाए।
- रिपोर्ट को न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश आरोपी के कथित व्यवहार और उपलब्ध रिकॉर्ड के प्रारंभिक अवलोकन के आधार पर दिया गया है।
जमानत याचिका हुई खारिज
आरोपी ने हाईकोर्ट से जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने माना कि मामले की प्रकृति गंभीर है और इस चरण में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
किन धाराओं में दर्ज है मामला?
आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें शामिल हैं—
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1)
- धारा 74
- धारा 351(2)
- धारा 352
- धारा 333
- पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 और 4
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66E
क्या हैं पीड़िता के आरोप?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने कथित रूप से उसका मोबाइल हैक कर निजी और आपत्तिजनक तस्वीरें हासिल कर लीं।
इसके बाद उसने—
- तस्वीरों और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया।
- सोशल मीडिया और निजी संदेशों से धमकियां दीं।
- कथित तौर पर तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर 5 लाख रुपये की मांग की।
पीड़िता के अनुसार, पहले दोनों के बीच संबंध थे, लेकिन बाद में आरोपी ने निजी तस्वीरों का दुरुपयोग कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
जमानत के बाद दोबारा धमकाने का आरोप
अभियोजन का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे जमानत मिली थी, लेकिन बाहर आने के बाद उसने कथित रूप से फिर से पीड़िता को धमकाना शुरू कर दिया।
इसके बाद पीड़िता ने दोबारा शिकायत दर्ज कराते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कोर्ट ने निष्पक्ष जांच पर दिया जोर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों, आरोपों और आरोपी के कथित व्यवहार को देखते हुए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसी क्रम में मानसिक स्थिति की जांच का निर्देश दिया गया है।
अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी आरोपी की मानसिक जांच कर रिपोर्ट संबंधित अदालत को सौंपेंगे। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
नोट: आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय और जांच के परिणाम पर निर्भर करेगा।



