


नई दिल्ली। संसद के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद अंदर का माहौल कैसा था, इस पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में मौजूद सांसदों के बीच चिंता का माहौल था और कई लोगों को आशंका थी कि भीड़ कहीं संसद भवन के अंदर प्रवेश करने की कोशिश न कर दे।
कंगना रनौत ने कहा कि प्रदर्शन के बाद सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवानों ने खुद आगे रहकर स्थिति को नियंत्रित किया।
कंगना रनौत ने क्या कहा?
लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि प्रदर्शन के बाद संसद के गेट बंद कर दिए गए थे और सांसदों की आवाजाही भी प्रभावित हुई थी।
उन्होंने कहा—
- संसद परिसर में मौजूद सदस्य काफी चिंतित थे।
- सुरक्षा कारणों से गेट बंद कर दिए गए थे।
- कुछ समय के लिए सांसदों को अंदर ही रहना पड़ा।
- दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर स्थिति संभाली।
कंगना ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के बीच खड़े होकर स्थिति नियंत्रित की और कई जवानों को चोटें भी आईं।
क्या था पूरा मामला?
सोमवार को पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बैनर तले प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी।
प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे—
- जंतर-मंतर क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
- कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे।
- निषेधाज्ञा लागू की गई थी।
- संसद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।
CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि—
- कई छात्रों को चोटें आईं।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की।
- कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
संगठन ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो के साथ कथित बदसलूकी का भी आरोप लगाया।
दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस ने कहा कि किसी व्यक्ति को निशाना बनाकर मारपीट नहीं की गई और लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
पुलिस के अनुसार—
- कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
- किसी के साथ जानबूझकर गलत व्यवहार नहीं किया गया।
- सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कार्रवाई की गई।
दोनों पक्षों ने लगाए आरोप
इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारी संगठन और पुलिस दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सख्ती की गई, जबकि पुलिस का दावा है कि भीड़ को नियंत्रित करने और संसद की सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
संसद सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
संसद भवन देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है, इसलिए किसी भी बड़े प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। सोमवार की घटना के बाद संसद परिसर की सुरक्षा और प्रदर्शन प्रबंधन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। वहीं प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है।




