विश्व नदी दिवस अवसर पर भूगोल विभाग द्वारा व्याख्यान , प्रश्न मंच एवं नारा लेखन

उमावाणी न्यूज
विश्व नदी दिवस अवसर पर भूगोल विभाग द्वारा व्याख्यान , प्रश्न मंच एवं नारा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ पूर्णिमा शुक्ला विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग कार्यक्रम की संयोजिका सुनीता चंसोरिया ने कहा नदियों का महत्व एवं हमारी जिम्मेदारी पर अपने विचार रखें हर साल सितंबर महीने के चौथे रविवार को यह दिवस मनाया जाता है 2026 की थीम है “जंगल नहीं तो नदिया नहीं, पानी नहीं तो जीवन नहीं”अनादि काल से नदियों ने हमारे समाज और जीवन को पोषित किया है नदियां संस्कृति और सभ्यता की जीवन रेखा है आज बढ़ती हुई गंदगी और प्रदूषण के कारण हमारी नदियां खतरे में है नदिया सुरक्षित रहेगी तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा नदी के संरक्षण के लिए नदी के किनारे पेड़ लगाए जिससे मिट्टी का कटाव रखेगा कारखानों और उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी को नदी में ना छोड़े मुख्य वक्ता डॉ पूर्णिमा शुक्ला ने कहा कि हमारे पूर्वज सदियों से नदियों के महत्व को जाना और यही कारण था कि नदी को धर्म से जोड़कर उसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया तथा उन्होंने बताया कि नदी जीवन दायिनी है नगरो का स्थल नदी तट है जिन्हें आज हम प्रदूषित किया।नदियों का संरक्षण सदियों से चला आ रहा है। ऋग्वेद के दसवें मंडल को समर्पित नदी सूक्त जहां अनेक श्लोक नदियों को समर्पित है।अर्थात प्राचीन काल से ही हमारे पूर्वज नदियों के महत्व से परिचित थे। पूर्वज और आज भी बड़े लोग स्नान करते समय नदियों पर श्लोक बोलते है ——- **गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
* आज हम सभी नदी दिवस मनाने उपस्थित हैं।यह दिवस प्रतिवर्ष सितंबर माह के चौथे रविवार को मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य नदियों और प्रकृति का संरक्षण करना है।प्रकृति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सर्वप्रथम 2005 में कनाडा के संरक्षणविद मार्क एंजिलो ने नदी दिवस मनाया तब से आज तक यह दिवस मनाया जा रहा है।आज़म विकास की बात करे तो अधिकांश नगर नदियों के तटों पर स्थित है जो नदियो की जीवन रेखा है।लेकिन जाने अपने स्वार्थ के लिए नदियों को प्रदूषित किया औद्योगिक कचरे, प्रदूषित तत्व नदियों पर डाल रहे है उससे नदियों में यूट्रोफिकेशन के कारण एल्गल ब्लूम बनता है जो जल में ऑक्सीजन को कम कर देता है और नदियों की पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित होती है।अतः हमे चाहिए कि ह्म केवल नदी दिवस के दिन ही संरक्षण की बात न करे सदैव नदियों के संरक्षण पर ध्यान दें। इस कार्यक्रम में व्याख्यान के साथ प्रश्न मंच हुआ जिसमें 100से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। श्लोगन प्रतियोगिता भी हुआ ।इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया गया।कार्यक्रम में सुनीता चंसौरिया ने मंच संचालन किया, डॉ जे के होता ने आभार प्रदर्शन किया साथ ही भूगोल विभाग के सदस्य। डॉ संजीव प्रामाणिक श्री भूपेंद्र दुबे उपस्थित रहे ।