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30 हजार कोडीन कफ सिरप के बाद बड़ा एक्शन: मुख्य आरोपी के बहनोई को STF ने दबोचा, मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित दवाएं बरामद

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार के मामले में यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। हमीरपुर जिले के सुमेरपुर क्षेत्र के टेढ़ा गांव में छापेमारी कर एसटीएफ ने मामले के मुख्य आरोपी के बहनोई रविंद्र गुप्ता को पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान उसके मेडिकल स्टोर से कुछ प्रतिबंधित दवाएं बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है।

एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर मेडिकल कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, बरामद दवाओं और पूरे नेटवर्क में रविंद्र गुप्ता की कथित भूमिका को लेकर जांच जारी है।

30 हजार शीशी कफ सिरप की बरामदगी से शुरू हुई जांच

मामला 3 सितंबर का बताया जा रहा है। उस दिन बांदा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने पुनाहुर गांव के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर एक डीसीएम को पकड़ा था।

तलाशी के दौरान वाहन से करीब 30 हजार शीशी प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप बरामद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ ने इस खेप के पीछे जुड़े लोगों की तलाश शुरू की।

जांच में मुख्य आरोपी के रूप में बांदा के अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ शिवम गुप्ता का नाम सामने आया। आरोप है कि वह अपने बहनोई रविंद्र गुप्ता के नाम से संचालित ओम मेडिकल स्टोर के बिल का इस्तेमाल कर दवाओं की खेप मंगवाता था।

यूपी और एमपी में खपाने की थी तैयारी

जांच एजेंसियों के अनुसार, बरामद कफ सिरप को बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों में खपाने की तैयारी थी। इसमें उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों का भी जिक्र सामने आया है।

प्रियांशु की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की टीम उसके कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी थी। इसी क्रम में रविंद्र गुप्ता को टेढ़ा गांव से पकड़ा गया।

मेडिकल स्टोर से मिली प्रतिबंधित दवाएं

एसटीएफ की टीम ने टेढ़ा गांव स्थित ओम मेडिकल स्टोर पर भी कार्रवाई की। यहां से कुछ प्रतिबंधित दवाएं बरामद होने की जानकारी दी गई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस दुकान पर ओम मेडिकल स्टोर का बोर्ड लगा था, उसकी औपचारिक शुरुआत तक नहीं हुई थी। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि दुकान से दवाओं का कारोबार कब से चल रहा था, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं थी।

छापेमारी के बाद दुकान के बाहर लगा बोर्ड भी हटा दिया गया।

गांव में रविंद्र के पते को लेकर भी असमंजस

स्थानीय लोगों के बीच रविंद्र गुप्ता के मूल निवास को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। कुछ लोग उसे बांदा जिले का निवासी बता रहे हैं, जबकि कुछ के अनुसार उसका संबंध हमीरपुर से है।

इस मामले में अब एसटीएफ की जांच यह पता लगाने पर भी केंद्रित हो सकती है कि मेडिकल स्टोर का संचालन किस तरह किया जा रहा था और प्रतिबंधित दवाओं की खरीद-बिक्री या सप्लाई में उसकी क्या भूमिका थी।

स्थानीय पुलिस को कार्रवाई की जानकारी नहीं

दिलचस्प बात यह है कि एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया गया था। सुमेरपुर थानाध्यक्ष पवन कुमार पटेल ने बताया कि छापेमारी में स्थानीय पुलिस की मदद नहीं ली गई।

उन्होंने कहा कि एसटीएफ की टीम ने किसे पकड़ा और वहां से क्या बरामद हुआ, इसकी जानकारी स्थानीय थाने को नहीं है।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी एसटीएफ

30 हजार शीशी कोडीन कफ सिरप की बरामदगी के बाद जांच अब केवल एक खेप तक सीमित नहीं रह गई है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई कहां से हुई, इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और इस कथित कारोबार में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

फिलहाल रविंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी और मेडिकल स्टोर से बरामद दवाओं को लेकर जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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