मायावती का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, बोलीं- सपा का ‘PDA’ सिर्फ ढोंग, सोच और चरित्र में अब भी दोहरापन



बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने खास तौर पर समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के नारे पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने या नीले कपड़े पहनने से गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों के प्रति सोच नहीं बदल जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन वर्गों को लेकर वर्षों से चली आ रही जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी सोच को केवल दिखावे के जरिए बदला नहीं जा सकता।
‘PDA’ के नाम पर सपा पर मायावती का निशाना
मायावती ने समाजवादी पार्टी के PDA अभियान पर निशाना साधते हुए कहा कि वंचित और पिछड़े वर्गों के वास्तविक हित की बात करने वालों को अपनी सोच और नीयत साफ रखनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि PDA की बात करने वाले कुछ नेताओं की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा दोहरा रहा है।
बसपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को लेकर सपा और बसपा के बीच लगातार राजनीतिक खींचतान देखने को मिलती रही है।
नीला रंग अपनाने से नहीं बदलेगी सोच- मायावती
मायावती ने कहा कि केवल नीला रंग इस्तेमाल करने या बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े प्रतीकों को अपनाने से किसी राजनीतिक दल की वास्तविक विचारधारा नहीं बदल जाती।
उन्होंने कहा कि गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वास्तविक हित और कल्याण की भावना रखने वालों को अपने दिल और दिमाग को साफ रखना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में राजनीतिक दलों की नीयत और उनके व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए।
बसपा से निकाले गए नेताओं पर भी निशाना
मायावती ने उन नेताओं और लोगों पर भी टिप्पणी की, जिन्हें बसपा से अनुशासनहीनता सहित अलग-अलग कारणों से पार्टी से बाहर किया गया।
उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ लोग बाद में दूसरी पार्टियों या छोटे-छोटे संगठनों का गठन कर लेते हैं। मायावती ने ऐसे लोगों को स्वार्थी और अवसरवादी बताते हुए कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल के वास्तविक हित में नहीं हो सकते।
उन्होंने दूसरी पार्टियों को भी ऐसे नेताओं को अपने साथ जोड़ने को लेकर चेतावनी दी।
‘डूबते जहाज में सवार होने’ की दी मिसाल
मायावती ने कहा कि बसपा से निकाले गए लोगों को दूसरी पार्टियों में शामिल करना ‘डूबते जहाज में सवार होने’ जैसा है।
उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक दल गठबंधन के बिना चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं और सत्ता से बाहर रहकर भी सत्ता का लाभ लेने की कोशिश करते हैं।
मायावती ने ऐसे दलों और नेताओं को पहले अपने भीतर झांकने की सलाह दी।
आंबेडकर और बहुजन समाज का भी किया जिक्र
बसपा अध्यक्ष ने अपने बयान में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बहुजन समाज के हितों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बसपा से दूरी बनाने वाले नेताओं को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत है। मायावती ने दावा किया कि पार्टी और समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखना जरूरी है।
संन्यास वाले घटनाक्रम का भी किया जिक्र
मायावती ने अपने बयान में अपने राजनीतिक जीवन से जुड़े एक पुराने घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी लेने के लिए कहा गया था, उस दिन उन्होंने दबाव के बावजूद तुरंत संन्यास की घोषणा नहीं की थी।
उनके मुताबिक, पूरे घटनाक्रम को रोकने के लिए रातभर प्रयास किए गए। इसके बाद अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे उन्हें संन्यास की घोषणा करनी पड़ी।
मायावती ने कहा कि सही समय आने पर वह इस पूरे घटनाक्रम के बारे में पार्टी कार्यकर्ताओं को और जानकारी देंगी।
यूपी की राजनीति में बयान से बढ़ी हलचल
मायावती के इस बयान को उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ समाजवादी पार्टी लगातार PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से जोड़ने की कोशिश करती रही है, वहीं मायावती इस रणनीति की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाती रही हैं।
अब मायावती के ताजा हमले के बाद यूपी की राजनीति में PDA बनाम बसपा की सामाजिक राजनीति को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। हालांकि, मायावती द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप उनके बयान का हिस्सा हैं और संबंधित दलों का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।




