


CJP नेता सौरभ दास की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लेकर कथित टिप्पणियों के मामले में पहले से ही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रहे दास के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी अवमानना याचिका दायर की गई है।
यह याचिका हाई कोर्ट के एक आदेश को लेकर सौरभ दास की कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दास ने अदालत के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जो अदालत की अवमानना के दायरे में आती हैं।
किस मामले को लेकर दाखिल हुई याचिका?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में यह याचिका भाजपा युवा मोर्चा के राज्य महासचिव और अधिवक्ता नितिन गर्ग ने दाखिल की है।
याचिका के मुताबिक, सौरभ दास ने 20 अगस्त को हाई कोर्ट के एक फैसले की आलोचना करते हुए रोस्टर को लेकर सवाल उठाए थे। दास पर आरोप है कि उन्होंने दावा किया कि एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले को कथित तौर पर रोस्टर का उल्लंघन करते हुए एक दूसरी ‘स्वतंत्र बेंच’ से हटा दिया गया।
याचिकाकर्ता ने इन टिप्पणियों को न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित करने वाला बताते हुए अवमानना की कार्रवाई की मांग की है।
किस आदेश को लेकर हुआ विवाद?
मामला पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश से संबंधित है।
अगस्त में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित DA और DR जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि लंबित भुगतान किए जाने तक सरकार को बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-जरूरी खर्च से बचना चाहिए।
याचिका में इसी आदेश और उसके बाद सौरभ दास की ओर से सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों को आधार बनाया गया है।
सौरभ दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा था?
याचिका के अनुसार, 20 अगस्त को सौरभ दास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 3 अगस्त के हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए थे।
दास ने कथित तौर पर दावा किया था कि जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले को रोस्टर का उल्लंघन करते हुए उस बेंच से वापस ले लिया, जिसे वह स्वतंत्र बेंच के तौर पर देख रहे थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि 3 अगस्त के आदेश से पंजाब सरकार पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ा।
इसके साथ ही उन्होंने अदालत के तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस के बाद में चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नत होने को भी अपने पोस्ट में जोड़ा और दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाए थे।
हालांकि, इन आरोपों और दावों की पुष्टि न्यायिक रूप से होना बाकी है। हाई कोर्ट में दायर याचिका पर आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि कथित टिप्पणियां वास्तव में अवमानना के दायरे में आती हैं या नहीं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े मामले में भी कार्रवाई
सौरभ दास के खिलाफ इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से संबंधित मामले में भी आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
यह मामला कथित शराब घोटाले से जुड़े एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर न्यायाधीश को लेकर की गई कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
अदालत ने उन टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई थी और उन्हें न्यायपालिका के बारे में भ्रामक प्रचार से जुड़ा बताया था। इसी आधार पर दास के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही सामने आई।
इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं से जुड़े प्रकरण भी संदर्भ में रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट में CJP नेताओं को समन
सौरभ दास की मुश्किलें ऐसे समय और बढ़ी हैं, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा नेता गौरव भाटिया की मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए CJP से जुड़े नेताओं को समन जारी किए हैं।
इस मामले में सौरभ दास के अलावा आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके के नाम भी सामने आए हैं।
अब पंजाब-हरियाणा HC में होगी सुनवाई
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल नई याचिका के बाद सौरभ दास के खिलाफ न्यायपालिका से संबंधित टिप्पणियों का एक और मामला कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।
फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है। अदालत की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दास की कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों को आपराधिक अवमानना माना जाता है या नहीं।
कानूनी मामलों में आरोप और न्यायालय द्वारा तय किए गए तथ्य अलग-अलग होते हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।




