भाई दूज पर ही क्यों केदारनाथ धाम के कपाट होते हैं बंद

भैया दूज के पावन अवसर पर श्री केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। बुधवार सुबह विधि-विधान के साथ कपाट बंद होने के बाद सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों के साथ बाबा की पंचमुखी विग्रह मूर्ति शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर चुकी है। भारी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के जयकारों के साथ डोली के साथ धाम से रवाना हुए। अब अगले छह माह बाबा के दर्शन श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में ही होंगे।
भैया दूज के दिन ही क्यों बंद होते हैं बाबा केदारनाथ के कपाट: भैया दूज पर ही केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं। इसके पीछे एक कहानी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में महाभारत युद्ध के बाद पांडव द्रौपदी के साथ हिमालय दर्शन के लिए गए थे। तब उन्होंने केदारनाथ में भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया था और भाई दूज के दिन अपने पितरों का तर्पण किया और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भाई दूज से शीतकाल की शुरुआत मानी जाती है । भाई दूज दिवाली का पर्व है और इसके बाद ठंड बढ़ जाती है, जिससे हिमालय में रहना संभव नहीं है। इस दिन विधिविधान से केदारनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। वहीं हर साल महाशिवरात्रि पर कपाट खुलने का दिन तय किया जाता है।