जाति जनगणना के दुष्परिणाम जानना बहुत जरूरी है
जाति जनगणना के दुष्परिणाम जानना बहुत जरूरी है वर्तमान में वर्ग के अनुसार एससी एसटी ओबीसी जनरल की व्यवस्था है और इन वर्गों में अनेक को जातियां हैं और वर्ग आधारित होने के कारण अधिक संख्या वाले जाति और कम संख्या वाले जाती के लोगों को लाभ मिल रहा है परंतु जिस दिन जातिगत व्यवस्था की जाएगी तो केवल अधिक संख्या वाले जाति को लाभ मिलेगा और कम संख्या वाली जाति को कुछ भी लाभ नहीं मिल पाएगा और भारत में बहुत से ऐसी जातियां हैं जिनकी संख्या बहुत कम है फिर वे लोग ना तो प्रधानमंत्री बन पाएंगे ना मंत्री बन पाएंगे ना डॉक्टर बन पाएंगे ना इंजीनियर बन पाएंगे कुछ भी नहीं बन पाएंगे क्योंकि उनकी जाति की संख्या कम होगी और अधिक जनसंख्या वाली जाति को लाभ मिलेगा और हम हिंदू आपस में एक दूसरे से लड़ेंगे फायदा कुछ नहीं होगा अभी केवल वर्ग की व्यवस्था है उसमें भी हम हिंदू आपस में वर्गवाद को लेकर के विवादित हो जाते हैं तो सोचो जिस दिन जाति के आधार पर व्यवस्था की जाएगी तब क्या होगा 4000 से अधिक जातियों की जानकारी उपलब्ध है कुल मिलाकर जातिगत जनगणना केवल हिंदुओं को बर्बाद करने का एक व्यवस्था के रूप मे होगा जबकि संविधान सबको समानता का अधिकार देता है व्यक्ति किसी जाति धर्म लिंग भाषा का बोलने वाला या भारत के किसी क्षेत्र में रहने वाला सब को एक समान व्यवस्था प्रदान करता है परंतु जातिगत जनगणना समानता के अधिकार का एक तरह से उल्लंघन के समान है



