रायपुर

रोमांस के लिए होटल जाने की जरूरत नहीं है,

(उमा वाणी) रायपुर

रोमांस के लिए होटल जाने की जरूरत नहीं है,

ये क्या परोसा जा रहा है,देश में देश की सरकारें मूक दर्शक बनी देख रहीं हैं,होटल छोड़िए जनाब अब तो रेलवे स्टेशन,बस स्टैंड,पार्क,मॉल हर जगह संस्कारी’प्रेम की नई परिभाषा लिखी जा रही है,ऐसा लगता है जैसे सार्वजनिक स्थल नहीं,कोई प्राइवेट रूम हो और जब कोई संत या धर्मगुरु इस पर आवाज़ उठाता है तो कुछ मॉडर्न लोग बुरा मान जाते हैं।शायद इसलिए कि उन्हें संस्कार की बात सुनने की आदत नहीं रही क्योंकि खुलेआम अश्लीलता अब फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’हो गया हैं

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