कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित, रेड कॉर्नर नोटिस होगा जारी

वाराणसी: कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल के खिलाफ मंगलवार देर रात कोर्ट की अवमानना में मुकदमा दर्ज किया गया। अदालत ने 30 दिन के अंदर उसे पेश होने का आदेश जारी किया था। मुकदमा दर्ज होने के साथ ही शुभम को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। 19 नवंबर को भदवर में दो करोड़ रुपये की कफ सिरप बरामद की गई थी। मामले में रोहनिया पुलिस ने सिगरा के बादशाह बाग कॉलोनी निवासी शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद, आजाद जायसवाल, गाजियाबाद के सौरभ त्यागी, शिवानंद समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। शुभम जायसवाल की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
रोहनिया इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट-14 की ओर से 27 फरवरी को शुभम के खिलाफ धारा 84 की उद्घोषणा का नोटिस जारी किया गया था। इसके तहत उसे 30 दिन के अंदर पेश होने का आदेश जारी हुआ था। 30 दिन में पेश न होने पर मंगलवार देर रात विवेचक एसआई दिनेश त्रिपाठी की तहरीर पर केस दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज किए जाने के साथ ही शुभम को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है।
लगेगी चार्जशीट, जारी होगा रेड कॉर्नर नोटिस !
शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित किए जाने के साथ ही रोहनिया पुलिस अब उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकेगी। इसके बाद दुबई में छिपे शुभम के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
अमित सिंह टाटा, आलोक सिंह की पेशी नहीं हो सकी
लखनऊ जेल में बंद आरोपी अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह के खिलाफ कोतवाली थाने में केस दर्ज हैं। दोनों आरोपियों को एफटीसी-14 कोर्ट में पेश किया जाना था। सुरक्षा कारणों से उनकी पेशी नहीं हो सकी। पेशी के लिए नई तारीख देने के लिए कोर्ट में प्रार्थना-पत्र दिया है।
वैभव से हवाला के 22 लाख मिले, जेल
कफ सिरप तस्करी में सोमवार को गिरफ्तार सरगना शुभम जायसवाल के करीबी बर्तन कारोबारी वैभव जायसवाल के पास हवाला के 22 लाख रुपये बरामद हुए। पुलिस ने मंगलवार को उसे एफटीसी कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। सिंडिकेट से जुड़े पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
दारानगर निवासी बर्तन कारोबारी वैभव जायसवाल और हिरासत में पांच लोगों से पूछताछ में हवाला कारोबारियों का बड़ा रैकेट सामने आया है। यह सिर्फ कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल के काले धन को सफेद नहीं करता था, बल्कि हवाला के पैसे को तमाम कारोबार में लगाता था। वैभव जायसवाल समेत कई लोग 15-20 फीसदी कमीशन पर काम करते थे। कफ सिरप और शराब तस्करी के अलावा नशे के कारोबार से कमाए गए पैसे का भी वे प्रबंधन करते थे। मामले में सिगरा, परेड कोठी और पंचक्रोशी चौराहे से आरोपियों को उठाया गया।




