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लकड़ी बीनने गई महिला पर टूटा मौत का कहर! आवारा कुत्तों ने नोच-नोचकर ली जान, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

बड़वानी। पेट की आग इंसान से क्या कुछ नहीं कराती। कोई आलीशान जीवन जीता है तो कोई दो वक्त की रोटी के लिए तपती धूप और कटीली झाड़ियों के बीच संघर्ष करता है। बड़वानी के पाटी नाका टीन शेड में रहने वाली 35 वर्षीय लीला बाई भी हर रोज इसी जद्दोजहद में निकलती थीं। पति दिलीप बकावले का हाथ बंटाने और घर का चूल्हा जलाने के लिए वो रोज शाम को राजघाट रोड पर लकड़ी बीनने जाया करती थीं। लेकिन शुक्रवार की उस बदनसीब शाम को किसे पता था कि लीला बाई जिस चूल्हे को जलाने के लिए सूखी लकड़ियां तलाश रही हैं, आज उसी घर में दुखों का ऐसा पहाड़ टूटेगा कि चूल्हा हमेशा के लिए ठंडा हो जाएगा।

रोजाना की तरह शुक्रवार शाम करीब 5 बजे लीला बाई राजघाट रोड स्थित ईंट भट्टों के पास लकड़ियां इकट्ठा कर रही थीं। इसी बीच आवारा कुत्तों के झुंड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। अकेली बेबस महिला खुद को बचाने के लिए भागती, इससे पहले ही आदमखोर बन चुके कुत्तों ने उन्हें जमीन पर गिरा दिया।

ईंट भट्टे में काम करने वाले चश्मदीद गोलू ने बताया कि अचानक कुत्तों के भौंकने और किसी महिला के चिल्लाने की आवाज आई। चीख सुनकर गोलू उसओर दौड़ा जहां से यह आवाजा आई थी। गोलू ने पत्थर मारकर कुत्तों को वहां से भगाने का प्रयास किया लेकिन जब तक कुत्ते वहां से भागते महिला गंभीर घायल हो चुकी थी। कुत्तों ने लीला बाई के हाथ, पैर, पेट और गले को बेरहमी से नोच डाला था।

लीला बाई की इस दर्दनाक मौत ने बड़वानी नगरपालिका की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर की सड़कों और सुनसान इलाकों में घूमते ये आवारा कुत्ते अब इंसानों के लिए काल बन चुके हैं। स्थानीय निवासियों में इस घटना के बाद से भारी आक्रोश है। लोगों का पूछना है कि आखिर कब तक मासूम और बेबस लोग प्रशासन की इस अनदेखी का शिकार होते रहेंगे? क्या किसी गरीब की जिंदगी की कीमत प्रशासन की नजरों में कुछ भी नहीं है?

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