UP चुनाव 2027 से पहले लखनऊ पहुंचे मोहन भागवत, जातीय समीकरण और सियासी रणनीति पर मंथन तेज

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे हैं। वह प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के तहत हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी समेत भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। विधानसभा चुनावों में संघ पर भी बड़ा दारोमदार रहा है ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा और सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात में अगले साल होने वाले यूपी चुनाव की तैयारियों का फीडबैक लेंगे। सूत्रों के अनुसार इस दौरान राजनीतिक तौर पर होने वाली जातिगत गोलबंदी की चुनौतियों से निपटने पर मंथन हो सकता है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच समन्वय के मुद्दों पर भी बात होगी। भाजपा संगठन के विस्तार जैसे मुद्दों की भी वह जानकारी लेंगे।
दरअसल, बिहार की तरह यूपी में भी जातीय गोलबंदी ही सबसे बड़ी चुनौती रही है। संघ का मानना है कि ओपी राजभर की सुभासपा, संजय निषाद की निषाद पार्टी और अनुप्रिया पटेल की अपना दल का साथ होने से पिछड़ा समाज की बड़ी आबादी उनके साथ है। इसके बाद भी लोकसभा चुनाव में वोटों के बिखराव ने मुश्किल हालात पैदा कर दिए। यही कारण रहा कि केंद्र में भाजपा अकेले बहुमत हासिल करने से पीछे रह गई। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही मंथन हो रहा है।
अखिलेश की पीडीए, मायावती की कोशिशों पर नजर
सीएम योगी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ ने बिहार से लेकर बंगाल तक अपना असर दिखाया है। संघ ने भी बंगाल में जमीनी स्तर पर काम किया और बटेंगे तो कटेंगे नारे की अहमियत को महसूस किया है। इसके बाद भी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यूपी में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को मुद्दा बनाते हुए भाजपा को पछाड़ दिया था। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती भी जातीय गोलबंदी की कोशिशों में जुटी हैं। रविवार को ही उन्होंने पदाधिकारियों की बैठक में ब्राह्मण समाज को बसपा के साथ आने का संदेश भी दिया है। उनकी कोशिश 2007 की तरह दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समाज को एकजुट करके भाजपा और सपा के सामने फिर से चुनौती खड़ा करना है।
चंद्रशेखर भी इस बार चुनौती बने
भाजपा के लिए इस बार नई चुनौती आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर भी रहेंगे। लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर अकेले दम पर सभी को पछाड़ते हुए चंद्रशेखर ने जीत हासिल की थी। इस जीत के बाद से वह लगातार एक्टिव हैं। दलित युवाओं का हुजूम उनके साथ दिखाई भी देता है। उनके निशाने पर इस बार कई विधानसभा सीटें हैं। नगीना वाला फार्मूला अगर वह पश्चिमी यूपी की सीटों पर चलाने में कामयाब हो गए तो भाजपा के सामने नई मुश्किलें पैदा हो सकती है। इसके साथ ही बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी भी निषाद समाज में सेंघमारी की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में भागवत का दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
फिलहाल अगले तीन दिनों तक मोहन भागवत का प्रवास निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर रहेगा। वहीं पर अवध, गोरक्ष, काशी और कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है। संघ के पूर्वी क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठकों में वह शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलनों के अलावा विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे। शाखा विस्तार पर भी उनकी बैठक प्रस्तावित है।




