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अमृत मिशन का फोल, 230 करोड़ खर्च के बाद भी जलसंकट


प्रोजेक्ट के लांच होने के बाद डिमांड कम होने के बजाय बढ़ गई, दो साल में पचास टैंकर से बढ़कर 75 टेंकर तक हो रही खपत

राजनांदगांव। चार साल पहले राजनांदगांव नगर निगम द्वारा करीब 230 करोड़ रुपए खर्च कर शहर के 51 वार्डों में नई पाइप लाइन का विस्तार किया गया था। उम्मीद थी कि मिशन का कार्य होने के बाद पेयजल में काफी हद तक जीत मिल जाएगी। लेकिन उल्टा टैंकरों से वार्डो में पहले से ज्यादा डिमांड होने लगी है। हालात यह है कि सिर्फ डीजल में ही रोज 25 हजार रुपए राशि फूंकी जा रही है।

शहर के 51 वार्डों में अमृत मिशन लांच करने के पहले शत प्रतिशत राहत देने प्रोजेक्ट डिजालइन किया गया था, ताकि पानी की समस्या आगामी तीस साल तक न हो। लेकिन इसके बाद भी शहर के दर्जनभर वार्ड में पेयजल की डिमांड जस के तस बनी हुई है। अभी भी शहर के बाबुटोला वार्ड, नया ढ़ाबा, लखोली, रेवाडीह, पेंड्री, कौरिनभांठा, चिखली, शंकरपुर, मोहारा, हल्दी, कन्हारपुरी, राजीव नगर, बसंतपुर, जैसे वार्डो में रोजाना 75 टैंकरो की सप्लाई हो रही है। इसके लिए रोज ढ़ाई सौ लीटर से अधिक डीजल की खपत हो रही है।

आंकड़े के अनुसार, रोज डीजल में 25 हजार खर्च हो रही है। राजनांदगांव जिले में भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर के आउटर और पटरी पार क्षेत्रों में पेयजल संकट बढ़ जाती है। अमृत मिशन योजना के तहत ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बावजूद दर्जनभर से अधिक वार्डों में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। नया ढाबा से लेकर आसपास के इलाकों में पानी की भारी किल्लत सामने आ रही है।

तीस साल की थी प्लानिंग

प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2017 में अमृत मिशन की शुरूआत हुई थी। जिसे लेकर शहर के आबादी को ध्यान में रखकर तीस साल की प्लानिंग की गई थी। लेकिन यहां आठ साल में भी समस्या कम होने के बजाय बढ़ गई है। शहर के 51 वार्डों में
पेयजल व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर पाइपलाइन विस्तार किया गया है।

शहर में 45,000 से अधिक नल कनेक्शन होने के बावजूद आउटर और भीतरूनी क्षेत्रों में पानी की किल्लत बनी हुई है। नगर निगम के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन 70 टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पाना अमृत मिशन योजना पर ही सवाल उठने लगे है।

रोज चार करोड़ लीटर से अधिक की खपत

गर्मी की शुरुआत में ही प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति करनी पड़ रही है। शहर में प्रतिदिन लगभग 4 करोड़ लीटर पानी की खपत हो रही है। इसके बावजूद कई वार्डों के अंदरूनी इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

जलापूर्ति के लिए उपयोग किए जा रहे कई टैंकर पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इनसे पानी सप्लाई के दौरान बड़ी मात्रा में पानी सड़कों पर ही बह जाता है। वहीं, टैंकर पहुंचते ही पानी भरने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन रही है।

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